RIL Share Price: रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% गिरे, एक दिन पहले ऑल-टाइम हाई का स्तर छुआ था
RIL Share Price: रूसी तेल को लेकर रिपोर्ट और खंडन से रिलायंस के शेयर में मंगलवार को 3.8% फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। कंपनी ने जामनगर रिफाइनरी को रूसी तेल मिलने की खबर को गलत बताया है।
RIL Share Price: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार (6 जनवरी) को शुरुआती कारोबार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। एनएसई पर शेयर 3.82% तक टूटकर 1517.80 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय आई जब एक दिन पहले ही रिलायंस का शेयर 1611.80 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में आई इस कमजोरी की बड़ी वजह एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट और उस पर कंपनी का सख्त खंडन माना जा रहा है। दरअसल, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूसी कच्चा तेल लेकर आ रहे तीन जहाज रिलायंस के जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। इस खबर के सामने आते ही बाजार में हलचल मच गई।
रिलायंस के शेयर क्यों गिरे
हालांकि,रिलायंस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। कंपनी ने अपने बयान में साफ कहा कि पिछले तीन हफ्तों में जामनगर रिफाइनरी को रूसी तेल की कोई खेप नहीं मिली है और जनवरी में किसी भी तरह की डिलीवरी की उम्मीद भी नहीं है। रिलायंस ने कहा कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पूरी तरह गलत” है और कंपनी इस बात से गहरा दुखी है कि खबर छापने से पहले उसके खंडन को नजरअंदाज किया गया।
रूसी तेल खरीदने का रिलायंस ने खंडन किया
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में एनालिटिक्स फर्म केपलर के डेटा का हवाला देते हुए कहा गया था कि कम से कम तीन टैंकर,जिनमें करीब 22 लाख बैरल रूस का यूराल्स क्रूड भरा है,जामनगर को अपना अगला ठिकाना दिखा रहे।
इस बीच, ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने रिलायंस को लेकर एक अलग नजरिया पेश किया है। जेफरीज के मुताबिक,अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में दखल बढ़ने से रिलायंस और ओएनजीसी जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता। अमेरिकी तेल कंपनियां वहां उत्पादन बढ़ा सकती हैं, जिससे 2027-28 में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है, बशर्ते ओपेक+ बाजार को संतुलित न करे।
जेफरीज ने यह भी कहा कि अगर अमेरिकी प्रतिबंध हटते हैं तो रिलायंस सस्ते वेनेजुएला क्रूड की खरीद कर सकती है। अतीत में रिलायंस अपनी रोजाना कच्चे तेल की जरूरत का करीब 20% हिस्सा वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA से लेती रही है। यह सप्लाई ब्रेंट के मुकाबले 5 से 8 डॉलर प्रति बैरल सस्ती हो सकती है, जिससे कंपनी के ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। वहीं,ओएनजीसी को भी करीब 50 करोड़ डॉलर के अटके हुए डिविडेंड मिल सकते हैं।
कुल मिलाकर, खबरों और खंडन के बीच रिलायंस के शेयर में उतार-चढ़ाव दिखा लेकिन आगे की तस्वीर वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक फैसलों पर टिकी रहेगी।
(प्रियंका कुमारी)