Indira Ekadashi 2024: सुख-समृद्धि के लिए आज इंदिरा एकादशी पर करें ये विशेष उपाय, पितृ भी हो जाएंगे प्रसन्न

पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पर जातकों को श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही पितरों की भी उन पर कृपा रहती है। इस वर्ष 28 सितंबर 2024, शनिवार को पितृ पक

By :  Desk
Updated On 2024-09-28 05:39:00 IST
पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पर जातकों को श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद मिलता है

Pitru Paksha Ekadashi 2024: आज पितृ पक्ष की एकादशी है, जिसे इंदिरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इंदिरा एकादशी समेत हर एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी की वजह से यह बेहद विशेष हो जाती है। इस एकादशी में श्री हरि नारायण की पूजा के साथ-साथ पितरों का श्राद्ध करने से यह विशेष है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी पर जातकों को श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद मिलता है, साथ ही पितरों की भी उन पर कृपा रहती है। इस वर्ष 28 सितंबर 2024, शनिवार को पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी पड़ रही है। चलिए जानते है इंदिरा एकादशी के कुछ विशेष उपाय। 

सुख-समृद्धि के लिए इंदिरा एकादशी के उपाय
(Indira Ekadashi Upay for happiness)

- इंदिरा एकादशी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक प्रज्ज्वलित करें। इसके पश्चात पेड़ की 11 बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि, पीपल के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। यदि एकादशी के दिन इसकी पूजा की जाएं, तो साधकों को त्रिदेवों के साथ-साथ पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

- इंदिरा एकादशी के दिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें। इसके अलावा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः' मंत्र का कम-से-कम 108 बार जाप करें। मान्यता है कि, ये दोनों पाठ और जाप करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही साधक को करियर में सफलता मिलने लगती है। 

- इंदिरा एकादशी के दिन दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त दीपक प्रज्ज्वलित करें। साथ ही एक काला कपडा लेकर उसमें एक मुट्ठी दाल काले तिल बांधे और घर की दक्षिण दिशा में रख दें। अगले दिन इन्हें गाय को खिला देवें, इससे पितृ दोष दूर होता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान करने का भी महत्व है। 

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। Hari Bhoomi इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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