Kumbh Sankranti 2025: कब है कुंभ संक्रांति? नोट करें तारीख, शुभ मुहूर्त, पुण्यकाल और महापुण्य काल समय

सनातन हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा रही है। ज्योतिष के अनुसार, फाल्गुन मास में जब सूर्यदेव मकर

By :  Desk
Updated On 2025-01-23 08:14:00 IST
फाल्गुन मास में जब सूर्यदेव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते है, तो कुंभ संक्रांति मनाई जाती है।

Kumbh Sankranti 2025: सनातन हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा रही है। ज्योतिष के अनुसार, फाल्गुन मास में जब सूर्यदेव मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते है, तो कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। सूर्यदेव का यह राशि परिवर्तन संपूर्ण राशिचक्र की राशियों को प्रभावित करता है। चलिए जानते है इस वर्ष कुंभ संक्रांति कब है? इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में- 

कब है कुंभ संक्रांति 2025?
(Kumbh Sankranti Kab Hai) 

ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्यदेव मकर से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करते है तो कुंभ संक्रांति मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष सूर्यदेव 12 फरवरी 2025, बुधवार को देर रात 10 बजकर 03 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। उदयातिथि को देखते हुए कुंभ संक्रांति 13 फरवरी को रहेगी। 

कुंभ संक्रांति पुण्य काल और महा पुण्य काल
(Kumbh Sankranti 2025 Maha Puny Kaal)

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कुंभ संक्रांति पर पुण्य काल दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से शाम 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। वहीं महा पुण्य काल दोपहर 4 बजकर 19 मिनट से शाम 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। क्रमशः पुण्य काल अवधि 5 घंटे 34 मिनट और महापुण्य अवधि 2 घंटा 51 मिनट रहेगी। 

कुंभ संक्रांति 2025 पूजा विधि
(Kumbh Sankranti 2025 Puja Vidhi)

  • - कुंभ संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल में स्नान करें। 
  • - इसके पश्चात जल में गंगाजल और तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्पित करें। 
  • - घर के मंदिर में दीपक प्रज्ज्वलित करें और सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करें। 
  • - सूर्य चालीसा का पाठ करें और किसी जरूरतमंद या पंडित को दान करें। 

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। Hari Bhoomi इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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