Pradosh Vrat 2025: चैत्र माह का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
प्रदोष व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। प्रदोष व्रत भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से
Chaitra Maas Guru Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना गया है। प्रदोष व्रत भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को समर्पित किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से भोलेबाबा और मां पार्वती का आशीर्वाद साधक को मिलता है। इस दिन व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। चैत्र माह की शुरुआत हो चुकी है और हर माह की तरह इस माह में भी प्रदोष व्रत रखा जाएगा, जो गुरुवार के दिन पड़ रहा है। इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत भी कहेंगे। चलिए जानते है चैत्र प्रदोष व्रत कब है?
मार्च में कब-कब है प्रदोष व्रत?
(Pradosh Vrat 2025 March)
वैदिक पंचांग के अनुसार, प्रतिमाह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस वर्ष चैत्र माह का पहला यानी कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 27 मार्च 2025, गुरुवार को रखा जायेगा। वहीं दूसरा प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष में 10 अप्रैल को रहेगा। यहां हम बात गुरुवार को पड़ रहे पहले प्रदोष व्रत की बात करेंगे। जिसकी अवधि 27 मार्च देर रात 01 बजकर 42 मिनट से रात्रि 11 बजकर 03 मिनट तक की रहेगी। वहीं, इस गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ समय शाम 06 बजकर 36 मिनट से लेकर 08 बजकर 56 मिनट तक का रहेगा।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
(Pradosh Vrat 2025 Puja Vidhi)
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़ें पहनें। इसके पश्चात मंदिर को स्वच्छ करें और भोलेनाथ और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। अब प्रतिमा का जलाभिषेक करें। फिर पूजा में सफेद मदार, कनेर या आक के फूल अर्पित कर बेलपत्र, भांग और धतूरा भी चढ़ाएं। आप शिवलिंग पर जनेऊ अर्पित कर सकते है। इस दौरान सफ़ेद चन्दन से शिवलिंग पर त्रिपुंड भी बनाएं।
साथ ही शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित करें। भोलेबाबा को ठंडाई, लस्सी, खीर व सफेद मिठाई का भोग लगाएं। अब शिवलिंग के समक्ष बैठकर रुद्राक्ष की माला से 108 बार "महामृत्युंजय मंत्र" का जाप करें। इस दिन पूजा में महिलाओं को माता पार्वती को शृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए, जिससे उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है। अंत में आरती कर अपनी पूजा संपन्न करें।