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वैज्ञानिकों ने बनाया चांद पर पानी का नक्शा, ऐसा दिखता है

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 15 2017 2:32AM IST
वैज्ञानिकों ने बनाया चांद पर पानी का नक्शा, ऐसा दिखता है

वैज्ञानिकों ने चांद की मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह में मौजूद पानी का पहला नक्शा तैयार किया है। इसे भारत के स्पेसक्राफ्ट चंद्रयान-1 पर लगे एक उपकरण की मदद से हासिल डाटा के आधार पर बनाया गया है। इससे भविष्य में चांद के बारे में रिसर्च में मदद मिलेगी।

चंद्रयान-1 ने 2008 में उड़ान भरी थी

चंद्रयान-1 ने 2008 में स्पेस में उड़ान भरी थी, इसका काम यह पता लगाना था कि ग्लोबल स्केल पर कितना पानी मौजूद है। तब अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने नासा के मून मिनरलॉजी मैपर के जरिए जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल कर एक नया प्रयोग किया था।

साइंस एडवांसेज जर्नल में पब्लिश स्टडी के मुताबिक चांद की मिट्टी में पानी और इससे जुड़े मॉलीक्यूल 'हाइड्रॉक्सिल' को सबसे पहले 2009 में खोजा गया था, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के एक-एक अणु से मिलकर बना है।

सतह पर करीब हर जगह पानी के संकेत

ब्राउन यूनिवर्सिटी में पीएचडी के पूर्व स्टूडेंट शुआई ली ने कहा, चांद की सतह पर करीब हर जगह पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यह सिर्फ धुव्रीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, जैसा कि पहले रिपोर्ट में बताया गया था।

चांद के नक्शे को तैयार करना आसान नहीं

वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद के नक्शे को तैयार करना पृथ्वी के नक्शे को तैयार करने जितना आसान नहीं है, क्योंकि पृथ्वी का नक्शा तैयार करने के दौरान भूगर्भीय ब्योरों के बारे में शक होने पर इससे जुड़ी जानकारी कन्फर्म करने के लिए वैज्ञानिक निजी तौर पर उस जगह पहुंच भी सकते हैं, लेकिन चांद पर ऐसा संभव नहीं है।

लापता चंद्रयान-1 का नासा ने लगाया था पता

चांद के लिए भारत का पहला मानवरहित अभियान चंद्रयान-1 के बारे में माना जा रहा था कि वह लापता हो गया है, लेकिन इसी साल मार्च में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों ने यह जानकारी दी कि भारत का यह स्पेसक्राफ्ट अभी भी चांद का चक्‍कर लगा रहा है।

करीब 3.9 अरब रुपए की कॉस्ट वाले चंद्रयान-1 को 2008 में छोड़ा गया था और इसका मकसद चांद की सतह की मैपिंग और कीमती धातुओं का पता लगाना था।

इसे दो साल के लिए मिशन पर भेजा गया था, लेकिन लॉन्‍च के एक साल बाद ही इसरो के वैज्ञानिकों का इससे कॉन्टेक्ट खत्म हो गया था। बाद में नासा ने भूमि आधारित रडार तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इसका पता लगाया।

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chandrayaan 1 data helps scientist to make water map on moon

-Tags:#Water On Moon#Water Map#Chandrayaan-1#NASA
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