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Film Review: रिलीज हुई असंस्कारी फिल्म, आंखे खोल देगी 'लिपस्टिक अंडर माई बुर्का'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 21 2017 1:03PM IST
Film Review: रिलीज हुई असंस्कारी फिल्म, आंखे खोल देगी 'लिपस्टिक अंडर माई बुर्का'

महिलाओं पर केंद्रित फिल्मों का दौर अभी भी जारी है। 'पिंक', 'पार्च्ड' के बाद अब 'लिपस्टिक अंडर माई बुर्का' लोगों के सामने आ चुकी हैं। महिलाओं के लिए आज भी समाज किस हद संकुचित सोच रखता है वह इसी बात से भी साबित होता है कि इस फिल्म को बैन कर दिया गया था लेकिन अब लंबे समय से चल रहे विवाद के बाद आखिरकार अलंकृता श्रीवास्तव द्वारा निर्देशत फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ आज रिलीज हो गई है।

फिल्म को सेंसर बोर्ड ने बैन कर दिया था। इसके बाद मेकर्स ने कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटकर फिल्म को सर्टिफिकेट दिलाया है और आखिरकार 'असंस्कारी फिल्म' रिलीज हो ही गई है।
 
आईए आपको बताते है कैसी है फिल्म-
 
कहानी-  फिल्म में भोपाल की पृष्ठभूमि दिखाई गई है। फिल्म वॉइस ओवर से शुरू होती है कि कैसे महिलाओं की जिंदगी में उदासी आ जाती है और फिर जवानी कांटे की तरह चुभने लगती हैं। लिपस्टिक चार महिलाओँ की कहानी है जो अलग-अलग होते हुए भी एक-साथ है। फिल्म में महिलाओं को अपनी जिंदगी में आधिकारों के लिए लड़ते हुए दिखाया गया है। 
 
फिल्म में हर एक महिला अपनी जिंदगी में आर्थिक रूप से सश्कत होना चाहती है तो कोई सिंगर बनना चाहती हैं लेकिन समाज के ढकोसले और सोच का क्या करें??
 
फिल्म की कहानी छोटे शहरों की चार महिलाओं पर आधारित है, जो आज़ादी की तलाश में है, लेकिन समाज इन्हें रोकने की कोशिश में लगा हुआ है। रेहाना (पल्बिता बोरठाकुर) एक टीनएज जो घर में भी बुर्का में रहती है और देसी माइली सायरस बनना चाहती है। लेड जेप का stairway to heaven उसका पसंदीदा गाना है। वो कॉलेज में जीन्स पर बैन के खिलाफ आवाज उठाती है और दुकान से सामान भी चुराती है।
 
 
शिरीन (कोंकणा सेन शर्मा) एक बुर्का पहनने वाली हाउसवाइफ है जिसका रुढ़िवादी पति उसे सेक्स ऑब्जेक्ट से ज्यादा कुछ नहीं समझता। वो अपनी खुशी के लिए घर घर जाकर सेल्स जॉब करती है।
 
लीला (आहना कुमारा) एक पार्लर चलाती है जो अपनी सुहागरात के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहती और इसे लेकर कई सपने सजाती है।
 
बुआ जी उर्फ उषा परमार (रत्ना पाठक शाह) 55 साल की महिला है जिसका यौन अस्तित्व समाज में स्वीकार्य नहीं है। वो तैराकी के लिए जाती है और दूसरे नाम के साथ फोन सेक्स में लिप्त होती है। असल में ये चारों महिलाएं एक मिट्टी के घर में रहती है जो बुआ जी का है और बाकी तीनों इसमें किराएदार हैं।
 
देसी नाम लिपस्टिक वाले सपने के साथ इन चारों की कहानियां फिल्म में समांतांर में दिखाई गई है जिसकी मुख्य किरगार रोजी हार्बर के कल्पना और सपनों की दुनिया में होती है। बाकी पूरी फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे चारों महिलाएं परिणाम जानते हुए भी विद्रोह करती हैं।
 
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