राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 'ट्रुथ सोशल' पर दावा किया था कि "थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज खोल देंगे और तेल पर कब्जा कर लेंगे।" हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट इस दावे के बिल्कुल उलट कहानी बयां कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपनी 'लाइफलाइन' और अमेरिका के खिलाफ सबसे प्रभावी 'सौदेबाजी का हथियार' बना लिया है। इंटेलिजेंस अधिकारियों का मानना है कि ईरान इस रास्ते को जल्द खोलने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इसी के जरिए वह वैश्विक तेल बाजार को नियंत्रित कर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बना रहा है।
यह रिपोर्ट बताती है कि सैन्य ताकत के बावजूद होर्मुज को सुरक्षित रूप से फिर से शुरू करना अमेरिका के लिए बेहद जटिल और जोखिम भरा काम है।
'परमाणु हथियार से भी बड़ा खतरा' बना होर्मुज का चोकहोल्ड
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान यह समझ चुका है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को रोकने की उसकी क्षमता परमाणु बम से भी अधिक शक्तिशाली है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान प्रोजेक्ट डायरेक्टर अली वैज के अनुसार, "ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की कोशिश में अमेरिका ने उसे 'महा-विनाश का हथियार' सौंप दिया है।"
होर्मुज के जरिए ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना चुका है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जब तक ईरान को अपनी शर्तों पर कोई बड़ा 'ऑफ-रैंप' नहीं मिलता, वह इस रास्ते को बंद ही रखेगा ताकि ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहें और अमेरिकी जनता के बीच ट्रंप की युद्ध नीति के खिलाफ गुस्सा बढ़े।
क्या युद्ध ने बढ़ा दी ईरान की क्षेत्रीय ताकत?
अमेरिकी जासूसों का यह भी आकलन है कि जिस युद्ध का उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को खत्म करना था, उसने अनजाने में ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को और बढ़ा दिया है। होर्मुज जलमार्ग को सफलतापूर्वक बंद रखकर ईरान ने अपनी उस क्षमता का प्रदर्शन किया है जिससे पूरी दुनिया डरी हुई है।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, 5 हफ्तों से चल रहे इस युद्ध ने साबित कर दिया है कि ईरान अपने सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना को चुनौती दे सकता है। यह स्थिति न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए चिंताजनक है, बल्कि उन देशों के लिए भी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया और भविष्य का अनिश्चित संकट
खुफिया रिपोर्ट के लीक होने के बाद व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी आश्वस्त हैं कि होर्मुज बहुत जल्द खुल जाएगा। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वे जल्द समझौता नहीं करते, तो उनके बिजली संयंत्र और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढाँचे अगले निशाने पर होंगे।
हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य हमले केवल तनाव बढ़ाएंगे, रास्ता नहीं खोलेंगे। होर्मुज का रास्ता केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है, जहां जहाजों को निशाना बनाना बेहद आसान है। ऐसे में अगले हफ्ते होने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक और ट्रंप की कूटनीति ही यह तय करेगी कि दुनिया को इस महा-ऊर्जा संकट से मुक्ति मिलेगी या नहीं।