सऊदी अरब के रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर 4 मार्च को ईरान के ड्रोन हमले ने भारी तबाही मचाई थी। WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नुकसान अमेरिकी अनुमानों से कहीं ज्यादा भयानक और रणनीतिक है।

Middle East Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब केवल सीमावर्ती इलाकों या समुद्र तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सीधे कूटनीतिक ठिकानों तक पहुँच गया है। सऊदी अरब, जो इस युद्ध में अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है, वहां की जमीन पर स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर ईरान ने युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदल दिया।

यह हमला न केवल ईंट-पत्थर की इमारत पर प्रहार है, बल्कि यह क्षेत्र में अमेरिकी दबदबे और सुरक्षा व्यवस्था को दी गई एक सीधी चुनौती है। इस हमले ने साबित कर दिया है कि ईरान के ड्रोन अब खाड़ी के किसी भी कोने में 'सटीक प्रहार' करने में सक्षम हैं।

सोच से भी ज्यादा विनाश: दूतावास परिसर में भयंकर तबाही 
अमेरिकी इंटेलिजेंस और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, वे डराने वाले हैं। शुरुआत में अमेरिका ने इसे एक छोटा हमला बताया था, लेकिन सैटेलाइट फोटो और जमीनी रिपोर्टों से पता चला है कि ईरान के 'सुसाइड ड्रोनों' ने दूतावास के मुख्य प्रशासनिक ब्लॉक और संचार केंद्र को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।

धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां तक टूट गईं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने इस हमले में 'शहाद-136' के उन्नत संस्करण का इस्तेमाल किया, जिसने दूतावास के सुरक्षा रडार को चकमा दे दिया। इस डैमेज ने अमेरिका के 'कॉन्फिडेंस' को हिला कर रख दिया है।

​सुरक्षा घेरा फेल: रियाद के 'हाई-सिक्योरिटी जोन' में कैसे घुसे ड्रोन? 
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि रियाद के जिस इलाके में अमेरिकी दूतावास स्थित है, वहां की सुरक्षा अभेद्य मानी जाती थी। पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम और अन्य जैमर्स के बावजूद ईरान के ड्रोन लक्ष्य तक पहुँचने में सफल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने 'स्वार्म तकनीक' का इस्तेमाल किया होगा, जिससे अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ओवरलोड हो गया।

दूतावास के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण दस्तावेजों और तकनीकी उपकरणों के नष्ट होने से अमेरिका को अरबों डॉलर का रणनीतिक नुकसान हुआ है।

​ट्रंप की 'प्रतिशोध' की चेतावनी और मिडिल ईस्ट में खौफ 
इस हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि दूतावास पर हमला 'युद्ध की घोषणा' के समान है। व्हाइट हाउस में हुई एक आपातकालीन बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि अमेरिका अब ईरान के भीतर मौजूद उसके कूटनीतिक और सरकारी केंद्रों पर पलटवार कर सकता है।

सऊदी अरब ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की थी और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था। फिलहाल, रियाद में अमेरिकी एम्बेसी का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है और वहां तैनात कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है। दुनिया को डर है कि यह 'दूतावास युद्ध' अब एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष को जन्म दे सकता है।