BLA ने पाकिस्तानी सरकार को 7 दिन की समय सीमा दी गई है। शर्तें पूरी न होने पर जवानों को मारने की धमकी दी गई है, जिससे पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है।

नई दिल्ली : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। BLA के 'मजीद ब्रिगेड' ने दावा किया है कि उन्होंने बलूचिस्तान के विभिन्न इलाकों से पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 7 जवानों को अपने कब्जे में ले लिया है। इस अपहरण के बाद समूह ने शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य नेतृत्व को 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है।

BLA ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो इन सैनिकों को 'क्रांतिकारी अदालत' के फैसले के तहत मौत के घाट उतार दिया जाएगा।

​सैन्य वाहनों पर हमला कर जवानों को बनाया बंधक

​BLA द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई बलूचिस्तान के मस्तुंग और बोलान के पर्वतीय इलाकों में की गई। लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना की एक टुकड़ी पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें कई सैनिक हताहत हुए और 7 को जिंदा पकड़ लिया गया।

पकड़े गए जवानों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद करने का दावा किया गया है। BLA ने इन जवानों की तस्वीरें और पहचान पत्र भी सोशल मीडिया पर जारी किए हैं ताकि उनके दावों की पुष्टि हो सके।

​BLA की शर्तें और अल्टीमेटम

​बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान सरकार के सामने कई कठोर शर्तें रखी हैं। उनकी मुख्य मांग बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बंद करना और पाकिस्तानी सेना की इस क्षेत्र से पूर्ण वापसी है।

इसके अलावा, उन्होंने जेलों में बंद अपने साथियों की रिहाई की भी मांग की है। BLA के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा, "हमने इस्लामाबाद को 7 दिन का समय दिया है। यदि वे बातचीत के लिए तैयार नहीं होते या हमारी शर्तों को नहीं मानते, तो बंधक बनाए गए सैनिकों की जान की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना की होगी।"

​पाकिस्तानी सेना और सरकार की खामोशी

​इस गंभीर घटनाक्रम पर अभी तक रावलपिंडी या इस्लामाबाद की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बलूचिस्तान के उन इलाकों में बड़े पैमाने पर 'सर्च ऑपरेशन' शुरू कर दिया गया है जहा अपहरण की घटना हुई है।

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां बंधक बनाए गए जवानों की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश कर रही हैं। यह घटना पाकिस्तानी सेना के लिए एक बड़ी शर्मिंदगी का विषय बन गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती है।

​चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर मंडराता खतरा

​यह अपहरण ऐसे समय में हुआ है जब बलूचिस्तान में चीनी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। BLA लगातार चीन और पाकिस्तान के आर्थिक गठजोड़ का विरोध कर रहा है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जा रहा है कि पाकिस्तान अपने ही क्षेत्र में सुरक्षा देने में विफल साबित हो रहा है।

सैनिकों के अपहरण की इस घटना ने बलूचिस्तान में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है और आने वाले 7 दिन पूरे क्षेत्र की राजनीति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।