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सात साल की उम्र में किया था पहला ऑपरेशन, बना इंजीनियर

आकृत जसवाल 10 महीने की उम्र में चलने और बातें करने लगा था।

सात साल की उम्र में किया था पहला ऑपरेशन, बना इंजीनियर
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नई दिल्ली. दुनिया में कई तरह के लोग पाए जाते हैं जिनमें बचपन से ही दुर्लभ गुण पाए जाते हैं। कुछ बच्चे बड़ी ही कम उम्र में इतने तेज होते हैं कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। ऐसा ही एक बच्चा है जिसने महज 7 साल की उम्र में ही सर्जरी करना शुरु कर दिया। हिमाचल प्रदेश के नुरपुर में पैदा हुए इस बच्चे का नाम आकृत जसवाल है। आकृत ने 7 साल की उम्र में 19 नवम्बर 2000 को शल्य चिकित्सा की और दुनिया में सबसे कम उम्र का सर्जन बन गया।
आकृत ने बचपन में ही विज्ञान और शरीर रचना विज्ञान के लिए अपने अंदर एक जुनून विकसित की है। स्थानीय अस्पतालों में डॉक्टरों ने आकृत को नोटिस किया और उसे जब वह सात साल का था तब सर्जरी निरीक्षण करने की इजाजत दे दी थी।
एक गरीब परिवार जो स्वास्थ्य सेवा के लिए लगने वाले भुगतान को देने में असमर्थ था उसने आकृत की अद्भुत क्षमता के बारे में सुना तो उसने आकृत से पुछा क्या तुम मेरी 8 साल की बेटी का इलाज करोगे? उसकी बेटी बुरी तरह से जल चुकी थी। उसकी उंगलियां जलने से आपस में जुड़ गई थी और एक नॉटेड गेंद की तरह कर्ल हो गई थी। उसका परिवार एक चरवाहा था जो सर्जरी का खर्च वहन नहीं कर सकता था।
आकृत जसवाल ने उस चरवाहे परिवार की आठ वर्षीय बेटी का सफलतापूर्वक सर्जरी किया और अब उसकी उंगलियां एक दूसरे से अलग गो गई हैं।
दुनिया में कुछ लोग हैं जो अपने काम और अधिनियम द्वारा पूरी दुनिया को चकित कर रहे हैं। आकृत जसवाल उनमें से एक है। 10 महीने की उम्र में यह बच्चा चलने और बातें करने लगा। 5 वर्ष की उम्र में इसने शेक्सपियर की किताबों को पढ़ना शुरु कर दिया। जो निश्चित रूप से अपनी उम्र के एक औसत लड़के के लिए आसान नहीं है। भारत में इसका आइक्यू लेवल 146 दर्ज किया गया है जो भारत का अभी तक का सबसे तेज माना गया है।
सबसे कम उम्र के सर्जन होने के नाते, आकृत ने चिकित्सा प्रतिभा की ख्याति प्राप्त की है। आकृत ने धर्मशाला में माध्यमिक शिक्षा के अध्यक्ष श्री बी.आर. राही के देख रेख में पढ़ाई की है। 12 साल की उम्र में आकृत ने पंजाब के चंडीगढ़ कॉलेज विश्वविद्यालय में विज्ञान की डिग्री के लिए अध्ययन किया। वह सबसे कम उम्र का छात्र था फिर भी भारतीय विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकार कर लिया गया।
आकृत की कैंसर का इलाज खोजने के लिए इच्छा को देख पूरी दुनिया का ध्यान उसकी तरफ जाने लगा। 'फायरक्रेकर फिल्म्स' ने आकृत के बारे में कहानी की जांच की उसके बाद उसे लंदन के लिए आमंत्रित किया और वहां लंदन में आकृत ने प्रमुख चिकित्सा शोधकर्ताओं से मुलाकात की।
आकृत वास्तव में एक असाधारण लड़का है, जो कैंसर के इलाज खोजने पर जोर दे रहा है। वर्तमान में अब उसकी उम्र 23 साल है और आइआइटी कानपुर से अपनी बायोइंजीनियरिंग पूरा कर लिया है।
आकृत ने युवा उम्र में कई उपलब्धियां हासिल की है और अभी भी मानवता के लिए काम कर रहा है। वह निश्चित रूप से अपनी उम्र से ऊपर के सभी लोगों के लिए प्रेरणा और प्रेरणा का एक स्रोत है।
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