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इस गांव में नहीं है लोगों को कैश की जरुरत

गांववाले एटीएम कार्ड के द्वारा पैसो का भुगतान करते हैं।

इस गांव में नहीं है लोगों को कैश की जरुरत
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ठाणे. ठाणे का धसई गांव पूरी तरह से कैशलेस होने वाला है। इस गांव के लोग व्यापारियों से लेकर सब्जी वाले तक को एटीएम कार्ड से पैसे का भुगतान करते हैं। जनधन योजना के तहत गांववाले एटीएम कार्ड के द्वारा पैसो का भुगतान करते हैं।
ठाणे जिले के धसई गांव के 10,000 निवासियों ने नकद लेन-देन को खत्म करने का फैसला करके एक नई मिसाल पेश की है। गांव में 40 कार्ड स्वाइप मशीनों है। मिड-डे की खबर के मुताबिक गांववाले नाई से लेकर डॉक्टर तक को एटीएम कार्ड से भुगतान करेंगे। एक राज्यसभा सांसद ने गांववालों के पूरी तरह से कैशलेस हो जाने के फैसले पर कहा था कि, किसानों को ऑनलाइन लेन-देन और एटीएम कार्ड के बारे में न कुछ पता है और न ही वह इसे इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं। हालांकि अब गांववालों ने सांसद को एक मिसाल के तौर पर पहचान बनाकर गलत साबित कर दिया है।
सावरकर स्मारक संगठन के अध्यक्ष रंजीत सावरकर जो एक गैर सरकारी संगठन चलाते है उन्होनें गांव में कैशलेस यानि एटीएम कार्ड से भुगतान शुरु करने की पहल की थी। बैंक ऑफ बड़ौदा, और जन धन योजना की मदद से सभी ग्रामीणों के पास अब रूपे एटीएम कार्ड होगा। इस तरह गांव में एक नई सुविधा का आगाज हुआ है। इस गांव में एटीएम कार्ड से भुगतान की सुविधा से करीब 400 व्यापारियों को फायदा होगा। बहरहाल यह देश का पहला कैशलेश गांव होगा। जहां लोग पैसो का लेन-देन और भुगतान एटीएम कार्ड से करते हैं।
बता दें कि प्रधानमंत्री जनधन योजना का मुख्य उद्देश्य भारत की वित्तीय सेवाओं जैसे बैंकिंग, पैसे के लेन-देन , लोन, बीमा और पेंशन को उपयोगी और सुविधाजनक बनाना था। इस अभियान को अगस्त 2014 में शुरू किया गया था, जिसमे अब तक लगभग 25.68 करोड़ जन धन खातों में 72,834.72 करोड़ रुपये जमा हुए हैं यह अपने आप में एक बड़ा कदम है।
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