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दिल्ली की शान्ति देवी है भारत की पहली महिला ट्रक मेकेनिक

केंद्रीय मंत्री ने शान्ति देवी के बारे किया ट्वीट

दिल्ली की शान्ति देवी है भारत की पहली महिला ट्रक मेकेनिक
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दिल्ली. भारतीय समाज हमेशा से पुरुष प्रधान रहा है। समाज में महिलाओं को केवल घरेलू काम करने लायक ही समझा जाता है। लेकिन बदलते वक्त के साथ महिलाओं की स्थिति भी बदली और ये इतनी बदली की आज महिलाएं पुरुषों के बराबरी तक आ पहुंची है। इसी की मिसाल है 55 साल की शान्ति देवी।
शान्ति देवी भारत की पहली महिला मेकेनिक हैं, जो ट्रकों को चुटकियों में ठीक कर देती हैं। दिल्ली के बाहरी इलाके में नेशनल हाइवे 4 पर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर डिपो है वहीं पर आपको शान्ति देवी मुस्तैदी से ट्रकों को ठीक करती दिख जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री ने शान्ति देवी के बारे किया ट्वीट
हरसिमरत कौर ने लिखा, 'हम सब सुनते रहते हैं कि महिला को कौन-कौन से काम करने चाहिए लेकिन 55 साल की शान्ति देवी ने अपने काम से इन सब बातों को गलत साबित किया है। वह ट्रक मेकेनिक हैं। लैंगिक भेदभाव से मुकाबला करने के लिए हमें शान्ति देवी की तरह अन्य साहसी महिलाओं की जरूरत है।'
देखी हैं बहुत मुसीबतें: शान्ति देवी
शान्ति देवी अपने जीवन के बारे में बात करते हुए बताती हैं कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत सारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा है। लोग पहले उनके इस काम का मजाक उड़ाया करते थे लेकिन धीरे-धीरे सब तारीफ करने लगे तो मुझे भी हिम्मत मिलने लगी।
शान्ति देवी अपने वर्कशॉप पर दिनभर ट्रक ठीक करने के काम में व्यस्त रहती हैं। इस काम में उनके दूसरे पति राम बहादुर सहयोग करते हैं। शान्ति देवी को ट्रक ठीक करते देखकर लोग अचरज में पड़ जाते हैं। मीडिया में अपने बारे में खबरें पढ़कर शान्ति देवी को खुशी होती है और वह कहती हैं कि इस वजह से उनको पहचान मिली है। उनका कहना है कि महिला चाहे तो कुछ भी कर सकती हैं।
खुद के पैसों से की शादी
शान्ति ने बताया कि उनका परिवार बेहद गरीब था और परिवार का पेट पालने के लिए मेरी मां बहुत मेहनत किया करती थी। मां को काम करते देख मेरी हिम्मत भी बढ़ी।
शान्ति ने सबसे पहले सिलाई और बीड़ी बनाने का काम किया। जिसके जरिए वो 45 सौ रुपए जमा करने में कामयाब हुईं और अपनी शादी कर ली।
शान्ति देवी का पहला पति कोई काम नहीं करता था। इस बारे में उन्होंने बताया कि वह जो भी कमाती थी, उनका पति शराब पीने में उड़ा देता था। परिवार की आर्थिक हालत खराब थी। एक वक्त का चूल्हा जलना मुश्किल था। ऐसे हालात में वह काम की तलाश में परिवार सहित 45 साल पहले दिल्ली आईं। पहले वह इसी डिपो में चाय की दुकान चलाती थीं।
शराब ने ले ली पति की जान
शराब पीने की वजह से शान्ति देवी के पहले पति की मौत हो गई। राम बहादुर के साथ उन्होंने दूसरी शादी की। डिपो में शान्ति देवी को चाय की दुकान से कम आमदनी होती थी। बाद में ज्यादा कमाई करने के लिए उन्होंने ट्रक ठीक करने का काम सीखा। इस काम में पति से उनको भरपूर मदद मिली।
वह कहती हैं कि पति के साथ वह टीम की तरह काम करती हैं। आज शान्ति देवी पति के साथ डिपो में पिछले 20 साल से भी ज्यादा समय से ट्रक ठीक करने का काम कर रही हैं। पति राम बहादुर को शान्ति देवी पर गर्व होता है। वह कहते हैं कि आज पत्नी की कमाई की वजह से उनके पास घर है। बच्चे पढ़-लिख गए और उनकी शादी हो सकी।
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