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नोटबंदी के विरोध में मुंडवाया सिर, जला दिए 23000 रुपए

छोटा-सा होटल और चाय की दुकान चलाने वाले याहिया ने आधा सिर मुंडवा लिया है।

नोटबंदी के विरोध में मुंडवाया सिर, जला दिए 23000 रुपए
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कोल्लम. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोटों को कागज के टुकड़े में बदलने के ऐलान के बाद से लोग परेशान हैं। बैंकों में 500, 1000 के नोट बदलने और एटीएम से 2000 रुपए निकालने के लिए लंबी लाइन लगी हुई है। लोगों के सामने दैनिक जरुरतों को पूरी करने का भी संकट खड़ा हो गया। जहां एक ओर लोग पीएम मोदी के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं वहीं पैसों के लिए मजबूर होने वाले कुछ लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है केरल के कोल्लम का रहने वाला याहिया। केरल के फूड वेंडर याहिया ने नोटबंदी के विरोध का अलग तरीका निकाला।
इन सब परेशानियों की वजह से केरल के कोल्लम के रहने वाले याहिया ने नोटबंदी के विरोध का एक अनूठा तरीक़ा अपनाया है। कोल्लम में छोटा-सा होटल और चाय की दुकान चलाने वाले याहिया ने आधा सिर मुंडवा लिया है। उसने कसम खाई है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता है तब तक मैं अपने बाल नहीं रखूंगा। केरल के कोल्लम में फास्ट फूड की दुकान चलाने वाले 70 साल के याहिया ने 500 और 1000 के नोट बंद होने की वजह से नाराज होकर सालों से बचाए हुए अपने रुपयों में आग लगा दी। याहिया ने 23000 रुपए के पुरानी करेंसी को आग में झोंक दिया।
केरल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ अशरफ कदक्कल ने फेसबुक पोस्ट करके इस बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे नोटबंदी के चलते याहिया को परेशानी का सामना करना पड़ा और क्यों उसने अपना आधा सिर मुंडवा दिया है।
उन्होंने उस शख्स के हवाले से लिखे गए फेसबुक पोस्ट में कहा- मेरा नाम याहिया है, मेरी उम्र 70 साल के करीब है और मैं केरल के कोल्लम जिले का रहने वाला हूं। मैं अपनी पत्नी और दो लड़कियों के साथ रहता हूं। पहले मैं पेड़ से नारियल तोड़ने और खेती का काम करता था जब मुझे लगा है कि मैं अपनी बेटी की शादी नहीं कर पाऊंगा तो मैंने सबकुछ बेचकर गल्फ जाने का फैसला किया। मुझे वहां बहुत समस्याएं भी हुई। जो भी थोड़ा बहुत जमा किया उसे लेकर वापस आ गया। उन पैसों और बैंक से लोन लेकर बेटी की शादी की। मैं खुद अपना पूरा होटल संभालता हूं, सारे काम खुद करता हूं। मैं आराम से काम कर सकूं इसलिए नाइटी पहनता हूं। मेरे पास 23,000 रुपए के पुराने नोट थे। मैंने इन्हें एक्सचेंज करने के लिए बैंक गया और दो दिन लाइन खड़ा में रहा।
उन्होंने आगे लिखा- दूसरे दिन बैंक की लाइन में खड़े रहने के दौरान मेरा शुगर लेवल कम हो गया और मैं लगभग गिर गया। कुछ अच्छे लोगों ने मेरी मदद की और मुझे अस्पताल पहुंचाया। मेरे ऊपर को-ऑपरेटिव बैंक का लोन है, इसके लिए मेरे पास कोई खाता नहीं है। को-ऑपरेटिव में सारे ट्रांजेक्शन बंद होने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मैं अपने पैसे कहीं भी नहीं जमा कर पाऊंगा। पाई-पाई जोड़कर बचाए अपने पैसे के लिए मैं कितने दिन तक लाइन में खड़ा रहता। मैंने अस्पताल से घर आने के बाद चूल्हा जलाया और सारे पैसे जला दिए। इसके बाद मैं नाई की दुकान गया और मैने अपना आधा सिर मुंडवा दिया। मैं तब तक अपने बाल वापस नहीं रखूंगा जब तक मेरी मेहनत और बचत को राख में मिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से बाहर नहीं कर दिया जाता है और इस देश को बचा नहीं लिया जाता।
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक डॉ अशरफ ने अपनी फेसबुक पोस्ट के आखिर में लिखा- डियर याहिया, तुम्हें इस तरह से जिक्र करने के लिए माफी चाहता हूं। तुम्हारा प्रदर्शन बहुत ही पावरफुल और अर्थपूर्ण है। उन्होंने याहिया का इस तरह जिक्र करने पर माफी भी मांगी है।

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