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अकबर काल में बिना फ्रिज के ऐसे जमाई जाती थी कुल्फी, जानिए तरकीब

बिना फ्रिज के कुल्फी जमाने की यह तरकीब खुद अकबर की थी।

अकबर काल में बिना फ्रिज के ऐसे जमाई जाती थी कुल्फी, जानिए तरकीब
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नई दिल्ली. वर्ष 2016 में गर्मी का मौसम दस्तक देने वाला है। ऐसे में यदि खान-पान की बात हो तो सबसे टेस्टी और लाजवाब चीज जिसे कोई भी खाने से मना नहीं कर सकता वो है गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली आईस्क्रीम। इसे हम कुल्फी के नाम से भी जानते है्ं। आधुनिक काल में तो कुल्फी बनाने के बहुत से तरीके हैं यदि आप गर्मियों में बाहर जाना पसंद नहीं करते तो घर पर ही कई तरीको से कुल्फी जमाकर खां सकते हैं।
लेकिन कभी आपने सोचा है कि आज तो सब ठीक है लेकिन उस जमाने में, जब ऐसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी तब लोग कुल्फी का लुत्फ कैसे उठाते होंगे? लेकिन क्या आप कि 15वीं शताब्दी में अकबर के शासन काल के दौरान भी कुल्फी का ट्रेंड था।हम बात कर रहे हैं अकबर के शासनकाल के दौरान खाई जाने वाली आइस्क्रीम यानि की कुल्फी की।

जलालुद्दीन अकबर
अब आप सोच रहे होंगे कि जिस जमाने की बात हम कर रहे हैं, वहां कुल्फी या आइसक्रीम का नाम भी जानते थे लोग? देखिए अब आम जनता तो नहीं लेकिन दीन-ए-इलाही, बादशाह जलालुद्दीन अकबर को इस के स्वाद से कैसे वंचित रखा जा सकता था।
जी हां, सही सोच रहे हैं, बिना फ्रिज के भी बादशाह अकबर कुल्फी का मजा उठाते थे और वो भी बकायदा बर्फ में जमी हुई कुल्फी।

कोन के आकार का कप- बादशाह अकबर और कुल्फी के बीच का मजबूत रिश्ता आपको तभी समझ आ जाएगा जब आप ये जानेंगे कि “कुल्फी” एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है “कोन के आकार का कप”, कुल्फी का आकार भी तो कुछ ऐसा ही होता है।
अबुल फजलदरअसल बादशाह अकबर के महल में अबुल फजल नाम का एक लेखक भी था, जिसने बादशाह की जीवनी में उनका कुल्फी के प्रति प्रेम को भी उकेरा है। कुल्फी बनाने की विधि को आज से 500 वर्ष पूर्व लिखी गई आइन-ए-अकबरी में ही लिख दिया गया था।

हिमालय से बर्फ- अकबर के काल में काफी मशक्कत के साथ सीधे हिमालय से बर्फ मंगवाई जाती थी, इसके लिए हाथी, घोड़ों और सिपाहियों की सहायता ली जाती थी। आगरा से हिमालय पर्वत करीब 500 मील दूर है, मतलब इतनी दूरी तय करके बर्फ बादशाह के महल तक पहुंचती थी। बुरादे और जूट के कपड़े में लपेटकर बर्फ को हिमालय से आगरा तक पहुंचाया जाता था। दूरी बहुत होने के कारण बर्फ की बहुत बड़ी सिल्ली, आगरा पहुंचते-पहुंचते छोटी सी रह जाती थी।
कुल मिलाकर 30-35 दस्तों की सहायता से बर्फ आगरा पहुंचती थी और यहां लाकर उसे एक संरक्षित कमरे में रख दिया जाता था ताकि वह पिघल ना सके। एक और रोचक बात यह है कि, आपको लगता होगा कि केमिकल की सहायता लेना आज की तकनीक है लेकिन आपको बता दें अकबर के काल में कभी-कभी सॉल्टपीटर नामक केमिकल का प्रयोग किया जाता था, जिसे पानी में मिलाकर पानी को जमाया जाता था।

बेगमों के लिए कुल्फी
सबसे पहले तो बर्फ का उपयोग शर्बत को ठंडा करने के लिए किया जाने के लिए किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे बर्फ का सिलसिला शुरू हुआ इसे बादशाह और उनकी बेगमों के लिए कुल्फी जमाने के लिए प्रयोग किया जाने लगा।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, कुल्फी का नाम दुनिया की बेहतरीन खाद्य पदार्थों में शामिल हो गई और हमें मिल गया एक टेस्टी डेजर्ट।

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