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डीजल-पेट्रोल से नहीं अब गंदे पानी से चलेगी आपकी कार

इस बात की जानकारी कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में भी दी जा चुकी है

डीजल-पेट्रोल से नहीं अब गंदे पानी से चलेगी आपकी कार
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कोलकाता. फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी और कचरा हमारी नदी और नहरों को जहरीला बना रहा है। लेकिन अब इस पानी का इस्तेमाल अब कार चलाने के काम आएगी। इतना ही नहीं कारखानों से निकलने वाले इस गंदे पानी का इस्तेमाल अब इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए भी किया जाएगा। IIT-खड़गपुर के वैज्ञानिक इस प्रॉजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
गैर-परंपरागत ऊर्जा मंत्रालय इस पूरे प्रॉजक्ट को फंडिंग दे रहा है। इस शोध को मंत्रालय ने अपनी पत्रिका 'अक्षय ऊर्जा' में भी जगह दी है। इस शोध की जानकारी कई प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में भी प्रकाशित की जा चुकी है। प्रकाशित होने के बाद से इसे ऑनलाइन वैज्ञानिक शोध प्लेटफॉर्म्स पर काफी साझा भी किया जा रहा है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, व्यावसायिक रूप से पैदा किए जाने वाले हाइड्रोजन का 95 फीसद हिस्सा कार्बन पदार्थों वाले कच्चे माल से तैयार किया जाता है। इस परंपरागत प्रक्रिया में काफी ऊर्जा की खपत होती है और ज्यादातर तो यह पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाता है।
IIT-खड़गपुर के शोधकर्ता बेकार बचे खराब पानी को डिस्टिल करने के बाद उससे उठे धुएं से हाइड्रोजन गैस बना रहे हैं। यहां के बायोटेक्नॉलजी विभाग में पढ़ाने वाले देबव्रत दास ने बताया कि इस प्रक्रिया के 2 फायदे हैं- पहला तो यह कि इससे हाइड्रोजन पैदा होगी और दूसरा यह कि इससे खराब पानी का जैविक उपचार कर उसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। देबव्रत इस शोध का नेतृत्व कर रहे हैं।
IIT-खड़गपुर परिसर में 10 मीटर क्यूब आयतन वाला एक बायोरिऐक्टर लगाया गया है, ताकि डिस्टिलरी से लगातार हाइड्रोजन गैस पैदा की जा सके। दास बताते हैं, 'इस गैस का इश्तेमाल सीधे फ्यूल सेल में भी किया जा सकता है। इससे 52kwh बिजली पैदा होगी, जिससे कि पूरे गांव की रोशनी का इंतजाम किया जा सकता है।'
दास ने आगे बताया, 'वाहनों में ईंधन के तौर पर भी हाइड्रोजन काफी मुफीद माना जाता है। सभी प्रमुख ऑटोमोबिल कंपनियां भविष्य में हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली कारें बनाने के लिए एक-दूसरे से कड़ा मुकाबला कर रही हैं। 2030 तक दुनिया भर में ऊर्जा की खपत इतनी बढ़ जाएगी कि हमें एक वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की जरूरत पड़ेगी। एक ऐसे ऊर्जा स्रोत की आवश्यकता होगी जिससे कि बहुत ज्यादा मात्रा में ऊर्जा पैदा की जा सके। हाइड्रोजन इस लिहाज से भी सबसे सही विकल्प है। हाइड्रोजन को इसीलिए भविष्य का ईंधन कहा जा रहा है। इसका ऊर्जा घनत्व सबसे ज्यादा 143kJg है।'
गैर-परंपरागत ऊर्जा मंत्रालय ने अपने 'नैशनल हाइड्रो जेन एनर्जी रोड मैप' में अनुमान जताया है कि साल 2020 तक हाइड्रोजन ऊर्जा से चलने वाले करीब 10 लाख वाहन भारत की सड़कों पर होंगे। साथ ही, देशभर में करीब 1,000 मेगावॉट हाइड्रोजन आधारित बिजली का उत्पादन किया जाएगा। मंत्रालय ने इस लक्ष्य को जल्द से जल्द पूरा करने का काम IIT-खड़गपुर को सौंपा है।
साभारः TOI
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