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''सफाईकर्मी'' भी कहलाता है लकड़बग्घा

अमूनन ये इंसानों से दूर ही रहते हैं पर जूठन के लिए रिहायशी इलाकों तक आ जाते हैं

सफाईकर्मी भी कहलाता है लकड़बग्घा
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नई दिल्ली. नामः लकड़बग्घा या हायना, वैज्ञानिक नामः Hyaenidae ये दो प्रकार के होते हैं- धारीदार ('स्ट्राइप्ड हायना', भारतीय उपमहाद्वीप) और चीतला ('स्पॉटेड हायना',अफ्रीका)। संस्कृत नाम 'तरक्षु'।
अमूनन ये इंसानों से दूर ही रहते हैं पर जूठन के लिए रिहायशी इलाकों तक आ जाते हैं। ये आईयूसीएन की रेड लिस्ट मे भी दर्ज हैं यानी इन्हें संरक्षण चाहिए। हाल के संरक्षण प्रयासों से भारत में इनकी संख्या बढ़ी है।
अजीब सा और बदबूदार जंगली प्राणी विभिन्न बोलियां बोलता है। दिन में ये विरले ही दिखते हैं। सड़े-गले और बीमारी से मरे उन जानवरों को भी वे खा जाते हैं, जिन्हें शिकारी पशु नहीं खाते। इसलिए इन्हें 'सफाईकर्मी' कहा जाता है। ये चमड़ा तक नहीं छोड़ते। लकड़बग्घा हड्डियां भी चट कर जाता है। इस कारण इसका मल चाक जैसा सफेद होता है।
आकार: लम्बाई 150 व ऊंचाई 90 सेमी, वजन 40 किलोग्राम तक। गर्दन मोटी, अगली टांगें भारी, आंखें गहरी, जीभ खुरदरी, चौड़ा सिर।
प्रजनन: मादा 2 वर्ष में बच्चे पैदा करने योग्य हो जाती है। एक बार में दो-तीन शावक पैदा होते हैं।
विशेषताएं: इसके शक्तिशाली जबड़े होते हैं। मजबूत अगली टांगें और नुकीले दांत होने के बावजूद यह बड़ा शिकार करने में असर्मथ है। कभी-कभी बीमार और जख्मी छोटे जीवों पर हमला करता है। गर्मियों में जब तालाब सूखने लगते हैं, इन्हें वहां मछली खाते हुए देखा जा सकता है।
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