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महिलाओं के लिए नहीं पुरुषों के लिए बनाई गई थी हाई हील्स

फारसी आर्मी के योद्धा घोड़े पर चढ़ने के लिए हाई हील का प्रयोग करते थे।

महिलाओं के लिए नहीं पुरुषों के लिए बनाई गई थी हाई हील्स
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नई दिल्ली. जूते से तो आप परिचित होंगे ही। जूता पैरों में पहनी जाने वाली एक ऐसी वस्तु है, जिसका उद्देश्य चलते, खेलते, दौड़ते समय पैरों को सुरक्षा और आराम देना है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की कभी पुरुष भी महिलाओं की ही तरह हाई हील्स पहना करते थे। सदियों से ऊंची एड़ी के जूते केवल महिलाओं में ही नहीं पुरुषों के लिए भी चलन में रहे। ईसा पूर्व 4,000 में प्राचीन मिस्र के गुंबदों में बनी म्यूरल कला में भी इसकी तस्वीर दिखती है।
संस्कृति के साथ जूते के डिजाइन व रंग रूप में बड़ा परिवर्तन
समय-समय पर संस्कृति के साथ जूते के डिजाइन व रंग रूप में बड़ा परिवर्तन आया है। अपने मूल स्वरूप में जूते काम के समय में पहना जाता था। समकालीन जूते बनावट मजबूती और लागत की दृष्टि से व्यापक रूप में भिन्न होते हैं।
ऊंची एड़ी के जूते का इतिहास
ऊंची एड़ी जूते के इतिहास की बात की जाए तो फ्रांस के लुइस चौदहवें का जिक्र करना और आधुनिक काल में फिलीपींस की फर्स्ट लेडी इमेल्डा मार्कुस का नाम जरूर दर्ज होगा। दरअसल लुइस चौदह एक महान शासक था, लेकिन उसकी लंबाई केवल पांच फुट चार इंच थी।
उसने अपनी इस कमी को पूरा करने के लिए 10 इंच की हील के जूतों से पूरा किया। जूतों की हील्स पर अक्सर उसके द्वारा जीते गए युद्धों को जिक्र उकेरा जाता था। 1740 तक पुरुषों ने ऊंची हील का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था। 50 साल बाद ऊंची हील के जूते महिलाओं के पैरों से भी गायब हो गए।
हाल के वर्षों तक, जब विश्व की जनसंख्या के अधिकांश लोगों द्वारा जूते नहीं पहने जाते थे, क्योंकि वे खरीदने में समर्थ नहीं थे। बड़ी संख्या में उत्पादन के आगमन के उपरांत ही जूतों के सस्ती दर पर उपलब्ध होने से, जूते पहनने का चलन प्रबल हुआ है।
चमड़े से बना था पहला जूता
सर्वाधिक पुराने जूते 1938 में ओरेगन, संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए गए 8000 से 7000 ईसा पूर्व पुराने सैंडल हैं। दुनिया का सबसे पुराना चमड़े का जूता जो गोचर्म के एक ही टुकड़े से बना था और सामने तथा पीछे सीवन के साथ चमड़े की डोरी से बांधा गया था। यह 2008 में आर्मेनिया की एक गुफा में पाया गया है और यह विश्वास किया जाता है कि यह 3500 ईसा पूर्व का है। 3300 ईसा पूर्व पुराने पर्वतारोहियों के जूते, ओत्जी जिनके तले भालू की खाल से बने थे।
वेनिस की वेश्याओं, ब्रिटेन के शाही परिवार और पेरिस के डिजायनरों को श्रेय
हाल की कुछ सदियों में ऊंची एड़ी के जूतों को प्रचलन में बनाए रखने के लिए वेनिस की वेश्याओं, ब्रिटेन के शाही परिवार और पेरिस के डिजायनरों को श्रेय देना होगा। आजकल जैसे जूतों का सबसे पुराना सबूत ईसा पूर्व 3,500 BC का है, जो अर्मेनिया की गुफा से मिला था।
9वीं सदी में फारस के घुड़सवारों के जूते
टोरंटो के बाटा शू म्युजियम की क्यूरेटर एलिजाबेथ सामेलहाक ने हाई हील के शुरुआती सबूत 9वीं सदी में फारस के घुड़सवारों के जूतों में पाए थे। जूतों में हील इसलिए जोड़ी गई ताकि घुड़सवार को अपने पैर रकाब में फंसाने में आसानी हो।
पर्शियन स्टाइल के जूते यूरोप पहुंचे
16वीं सदी के अंत में फारस के शाह अब्बास प्रथम के पास दुनिया की सबसे बड़ी सेना थी। वह पश्चिमी यूरोप के शासकों के साथ संबंध बना कर अपने शत्रु ऑटोमन सल्तनत को हराना चाहता था। इस तरह फारस के लोगों के साथ पर्शियन स्टाइल के जूते यूरोप पहुंचे जिन्हें शासक वर्ग ने हाथों हाथ लिया।
पुरुषों के लिए काउबॉय हील्स का चलन
1960 और 70 के दशक में पुरुषों के लिए काउबॉय हील्स का चलन लौटा। इस दौर के कई पॉप स्टारों ने इसे लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। जैसे 1973 में डेविड बोवी ने भी पहने थे हाई हील्स जूते।
महिलाएं बड़ी आभारी हैं
हॉलीवुड की मशहूर अदाकारा मर्लिन मुनरो ने कहा था, 'मुझे नहीं पता कि हाई हील का आविष्कार किसने किया लेकिन जिसने भी किया महिलाएं उसकी बड़ी आभारी हैं।' हाई हील का आविष्कार नहीं हुआ बल्कि समय के साथ यह चलन में आता गया और बदलता गया।
आजकल हाई हील के पर्याय बन चुके स्टिलेटोज असल में 1953 में शुरु हुए। डिजायनर क्रिस्चियन डिओर ने फ्रेंच जूतों की स्टाइल को दूसरे विश्व युद्ध के बाद फिर से जीवित किया। डियोर के लिए काम करने वाले डिजायनर रॉजर विवियर को स्टिलेटो के आविष्कार का श्रेय दिया जाता है।
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