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भगवान के लिए तीन दिन तक कमरे में बंद रहा पूरा परिवार

पुलिस ने पूरे परिवार को मेंटल हॉस्पिटल भेजा

भगवान के लिए तीन दिन तक कमरे में बंद रहा पूरा परिवार
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बगीचा. ईश्वर के प्रति आस्था अच्छी बात है। इससे मनुष्य का आत्मविश्वास बढ़ता है लेकिन यही आस्था अगर बिगड़ जाए तो यह अंधविश्वास का रूप धारण कर लेता है। कुछ ऐसा ही हुआ बगीचा में एक शिक्षक परिवार के साथ। तीन दिन से घर में कैद शिक्षक के पूरे परिवार को पुलिस की मौजूदगी में शुक्रवार को दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला गया। घर के भीतर उनकी दशा देख सभी की आंखें भौंचक रह गई। शिक्षक के भाई सभी सदस्यों को लेकर इलाज के लिए रांची मेंटल हॉस्पिटल रवाना हुआ।
जानकारी के अनुसार बगीचा के तहसील चौक में अब्राहम लकड़ा का मकान है। लकड़ा क्रिश्चन धर्मावलंबी हैं और पेशे से शिक्षक है। घर पर वह अपनी पत्नी, मां और 10 साल के एक बच्चे के साथ रहता है। बीते तीन दिनों से अब्राहम का मकान भीतर से बंद था और परिवार का कोईभी सदस्य बाहर नहीं निकल रहा था।
जिसपर बगल में रह रहे उसके भाई को शक हुआ और घर से धुआं निकलने व अगरबत्ती जलने की खुशबू देख उसने दरवाजा खुलवाने की कोशिश की परन्तु परिवार के सदस्यों ने किसी तरह की बाधा न डालने की बात कह कर लौटा दिया। जिस पर उक्त भाई को अपने बड़े भाई के लिए चिंता बढ़ गई और उसने पुलिस को सूचना दी। मौक पर पंहुची पुलिस कुछ देर नाकाम रही परन्तु कार्रवाई का भय दिखा कर उसने दरवाज तोड़कर अंदर दाखिल हुई।
भीतर का नजारा देख चौंक उठी पुलिस
भीतर का नजारा देख पुलिस और आसपास के लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। शिक्षक लकड़ा क्रिश्चन धर्म ग्रंथ बाइबिल जमीन पर रख कर उसके ऊपर लेटा हुआ था। अब्राहम को पकड़कर उसकी मां, पत्नी व 10 साल का एक पुत्र भी एक दूसरे को पकड़े लेटे हुए थे। सभी सिर्फएक ही बात कह रहे थे गॉड.गॉड। पुलिस ने पाया कि बीते तीन दिनों से अब्राहम लकड़ा प्रभु यीशु की आराधना कर रहा है। अब्राहम का कहना था कि वह गॉड को धरती पर उतारने के लिए विशेष पूजा कर रहा था।

मेंटल हॉस्पिटल के लिए रेफर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस की उपस्थिति में अब्राहम, उसकी मां, पत्नी व बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बगीचा पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार की कोशिश की। लेकिन मरीज को ठीक न होते देख इसे मेंटल केस बता कर मेंटल हॉस्पिटल कांकेर रांची भेज दिया गया।
शिक्षा देने वाला खुद अंधविश्वास का शिकार
यह घटना अगर किसी अशिक्षित ग्रामीण परिवार के साथ हुई होती, तो शायद इसे इतनी ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता। लेकिन यह घटना एक शिक्षक परिवार के साथ हुई है जो समाज में शिक्षका का अलख जलाता है। आज के इस वैज्ञानिक युग में अगर एक शिक्षक इस कदर अंधविश्वास में जकड़ा रहे, तो फिर उस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे क्या सीखेंगे?
अब्राहम व उसके परिवार के घर में बंद होनी की जानकारी उसके बड़े भाई ने दी थी। साथ ही उसने अनिष्ट की आशंका जाहिर की थी जिस पर पुलिस मौके पर जाकर सभी को घर से बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल भेजा।
-आशीष गौतम, टीआई, बगीचा
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