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जानिए क्यों ''मौत का टीला'' कहा जाता है मोहनजोदड़ो को

मोहनजोदड़ो के बुरी तरह से तबाह होने पर यहां केवल कंकाल दिखाई पड़े थे।

जानिए क्यों मौत का टीला कहा जाता है मोहनजोदड़ो को
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नई दिल्ली. इतिहास अपने आपको कभी न कभी तो दोहराता ही है। इतिहास के पन्नों को यदि पलटकर देखा जाए तो उनका जुड़ाव किसी न किसी घटना से निकलकर सामने आता है। चाहे वह महाभारत के द्वापर युग से लेकर 25 ईसा पूर्व के मोहनजोदड़ो से जुड़ी हो। अब आप सोचेंगे कि अचानक यहां पर मोहनजोदड़ो और महाभारत की बात कहां से आ गई।
तो आपको बता दें कि आज हम आपको एक ऐसा रहस्य बताने जा रहे है जिसे जानने के बाद आपको मोहनजोदड़ो के नगर के ध्वस्त होने, उसके महाभारत के साथ संबंध और मौत के टीले के बारे में पता चलेगा।
सबसे पहले बात करते है मौत के टीले की। कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिसके कारण से मोहनजोदड़ो को
मौत का टीला
भी कहा जाने लगा था। दरअसल इस नगर के बारे पता चलने के बाद वैज्ञानिकों ने रिसर्च की, रिसर्च के बाद एक ऐसा खुलासा हुआ जिसे जानने के बाद उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। वो सच ये था- कंकालों का मिलना। वैज्ञानिकों द्वारा की गई जांच-पड़ताल में पता चला कि, यहां कि हर गली हर नगर में कंकाल ही 'कंकाल' है। जिसके बाद से इस नगर को मौत का टीला भी कहा जाने लगा।
ये कंकाल जानवरों या पशु-पक्षियों के नहीं, बल्कि इंसानों के कंकाल थे। ये कंकाल काफी गंभीर अवस्था में पाए गए, कुछ तो बिखर कर इधर-उधर गिरे पड़े थे और कुछ तो ऐसे लग रहे थे मानो एक-दूसरे के हाथ इस तरह पकड़ रखे थे, मानो किसी विपत्ति ने उन्हें अचानक उस अवस्था में पहुंचा दिया था।
मोहनजोदड़ो का महाभारत से संबंध
कुछ शोधकर्ताओं ने इस नगर को महाभारत काल से भी जोड़ा है। माना जाता है कि मोहनजोदड़ो वही स्थान है जहां पाण्डवों एवं कौरवों के बीच कुरुक्षेत्र का युद्ध हुआ। दरअसल उस समय कुरुक्षेत्र की रणभूमि बेहद बड़ी हुआ करती थी, जो कि आज हरियाणा के छोटे से क्षेत्र तक ही सीमित बताई जाती है।
मोहनजोदड़ो फिलहाल जिस क्षेत्र में है वह वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के क्षेत्र में आता है। महाभारत काल में इसके उत्तरी हिस्से को गांधार, मद्र, कैकय और कंबोज की स्थली कहा जाता था। अयोध्या और मथुरा से लेकर कंबोज (अफगानिस्तान का उत्तर इलाका) तक आर्यवर्त के बीच वाले खंड में कुरुक्षेत्र होता था, जहां महाभारत युद्ध हुआ।
मोहनजोदड़ो का खात्मा
मोहनजोदड़ो नगर कब और कैसे खत्म हुआ, इस पर भी कई शोध है जिसमे से अधिकतर शोध यहीं कहते है कि नरकंकालों की जो अवस्था थी उन्हें देखने पर यही महसूस होता है कि यहां कोई बड़ा विस्फोट हुआ था। ठीक वैसा ही है जैसा हिरोशिमा-नागासाकी पर हुआ।
ऐसा माना जाता है कि यहां पर भारी आपदा आई होगी जिसके कारण से यह नगर इतनी बुरी तरह से ध्वस्त हुआ होगा।
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