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मंदिर में दान करो नहीं जाना पड़ेगा जेलः हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने यह दिलचस्प फैसला सुनाया

मंदिर में दान करो नहीं जाना पड़ेगा जेलः हाईकोर्ट
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अहमदाबाद. आपने वो तो सुना ही होगा कि गंगा नहाकर आप अपने पापा धो सकते हैं ठीक कुछ ऐसा ही एक रास्ता गुजरात हाईकोर्ट ने एक बिजनसमैन को सुझाया है। लेकिन इसमें बदलाव यह है कि उसे गंगा नहाने नहीं बल्कि मंदिर में दान देने की शर्त पर जेल की सजा से छूट देने की बात कही है।
वलसाड के रहने वाले मनुभाई अंबालिया को तीन महीने की जेल और 500 रुपये जुर्माने की सजा मिली थी। एक महिला की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के बाद मनुभाई ने उसके परिवार और सास-सुर के खिलाफ खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में एफआइआर दर्ज कराई थी। साल 1993 में वलसाड सेशन कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई। साल 2001 में कोर्ट इस नतीजे पर पहुंची कि उन्होंने महिला के परिवार के खिलाफ झूठे सबूत पेश किये थे।
बाद में मनुभाई ने भी कबूल कर लिया किया कि उन्होंने गुस्से में आकर झूठी एफआइआर लिखवाई थी। हालांकि उन्होंने सेशन कोर्ट से मिली सजा को हाई कोर्ट में चुनौती दी। 7 दिसंबर को हाईकोर्ट ने एक दिलचस्प फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सजामाफी के बदले मनुभाई को उस देवी/देवता के मंदिर में 50 हजार रुपये दान देना होगा जिसमें उनकी सबसे ज्यादा श्रद्धा हो। फिर क्या था, मनुभाई ने कोर्ट का यह प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया।
उन्होंने श्री चामुंडा माताजी डूंगर ट्रस्ट को 50 हजार रुपये दान में दिए और उसकी रसीद कोर्ट को सौंप दी। इस तरह मनुभाई को जेल जाने की नौबत नहीं आई। मामले की सुनवाई जस्टिस सैयद ने की थी। मनुभाई के वकील ने जज से कहा था कि चूंकि घटना को 15 साल हो गए हैं और इसके लिए जेल की सजा बहुत ज्यादा है। उन्होंने जज से कहा था कि उनको प्रायश्चित का एक मौका दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने वकील की दलील मान ली थी।
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