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नोटबंदीः नहीं है कैश, गांववालों ने तंग आकर किया ''गांव बंंद''

इस गांव के अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन पर निर्भर है

नोटबंदीः नहीं है कैश, गांववालों ने तंग आकर किया गांव बंंद
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वडोदरा. सरकार द्वारा किए गए 500 और 1000 के नोटबंदी से पूरा देश परेशान है। जो लोग शहरों में रहते हैं उन्हें लगता है सबसे ज्यादा परेशानी शहरों में ही हो रही है, लेकिन यहां हम आपको बता दें कि ऐसा नहीं है।
गुजरात के एक गांव ने नोटबंदी के विरोध में स्वेच्छा से मंगलवार को गांव के मुख्य बाजार को बंद रखने की घोषणा की गई। गुजरात का यह गांव आणंद जिले का जोल गांव है।
इस गांव के अधिकतर लोग कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। गांव के निवासियों का कहना है कि 8 नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की तब से ही वे लोग नकद की कमी से जूझ रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया
के मुताबिक, गांव के सरपंच जगदीश परमार कहते हैं, 'हमारे गांव में किसी राजनीतिक पार्टी ने बंद की घोषणा नहीं की लेकिन व्यापारियों ने अपनी स्वेच्छा से बाजार बंद रखा है क्योंकि उनके पास सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। अब तक ये लोग गांववालों को उधार पर राशन और दूसरी चीजें उपलब्ध करवा रहे थे लेकिन अब इनके पास भी थोक विक्रेताओं से सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। गांव में करीब 25 बड़े और छोटे व्यापारी हैं जो गांववालों को उधार सामान दे रहे थे।'
सरपंच बताते हैं, 'हालांकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का एक ब्रांच और एक एटीएम गांव में है लेकिन ब्रांच से एक व्यक्ति को सिर्फ 1 हजार रुपये ही निकालने की इजाजत है क्योंकि गांव के इस ब्रांच को बैंक के मुख्य ब्रांच से सिर्फ 50 हजार से 1 लाख रुपये तक ही मिलते हैं।'
नोटबंदी से पहले दूध मंडी में हर दिन 1 लाख से सवा लाख रुपयों तक नकद में वितरण होता था। लेकिन अब दूध उत्पादकों को नकद में भुगतान बंद कर दिया गया है। इस वजह से इन दूध उत्पादकों को हर दिन राशन खरीदने के लिए व्यापारियों से उधार लेना पड़ रहा है।
आणंद के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को गांव की परिस्थिति से अवगत करा दिया गया है। नोटबंदी का ऐलान ऐसे समय में किया गया है जब गांव के ज्यादातर किसान अपने फसलों की बुआई में लगने वाले थे। सरपंच कहते हैं, 'हमारे गांव के ज्यादातर किसान तंबाकू और करेला की खेती करते हैं। लेकिन किसानों के पास बीज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं और उर्वरक डिपो से उन्हें खाद भी मुहैया नहीं करायी जा रही है।'
गांव के एक व्यापारी का कहना है, हम इस तरह की परिस्थिति में ज्यादा दिन तक गुजारा नहीं कर पाएंगे क्योंकि हमारे पास भी पैसे नहीं हैं कि हम गावंवालों को उधार सामान दे सकें। इसलिए हम सबने बंद रखने का फैसला किया। हालांकि आणंद के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर धवल पटेल कहते हैं कि उन्हें गांव से नकदी की कमी की कोई शिकायत नहीं मिली है।
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