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पेशाब की मदद से बातचीत करती है यह ''मछली''

यह मछली पेशाब करके अपने प्रतिद्वंदी को सावधान करती है।

पेशाब की मदद से बातचीत करती है यह मछली
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नई दिल्ली. इंसानों की तरह जानवरों के पास एक-दूसरे से बात करने और औरों को अपनी बात समझाने के लिए शब्दों का सहारा नहीं होता है। कई जानवर ध्वनियां निकालकर साथी जानवरों को संकेत देते हैं, लेकिन ऐसे जानवर भी होते हैं जो किसी तरह की आवाज नहीं निकाल सकते।
ऐसे जानवर भी कई तरीकों से एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचाते हैं और संकेत देते हैं। चिड़िया गाती है। शेर दहाड़ते हैं। कुत्ते भौंकते हैं। यह आवाजें तो इंसान सुन सकता है, लेकिन कई ऐसे जानवर भी हैं जिनके आपसी संवाद पर इंसानों की नजर शायद कभी नहीं जाती है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध से पता चला है कि मछलियों की एक ऐसी प्रजाती भी है जो कि पेशाब द्वारा साथी मछलियों को संकेत देती है। सिच्लिड मछली की एक प्रजाती पेशाब में मौजूद रसायनों की मदद से अपने प्रतिद्वंदियों को सिग्नल देती है।
जब भी कोई प्रतिद्वंदी आक्रामक रवैया दिखाने लगता है, तो यह मछली पेशाब करके अपने प्रतिद्वंदी को सावधान करती है। उसके पेशाब में उपस्थिति रसायन प्रतिद्वंदी मछली को संकेत देने का काम करते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रजाति की बड़ी मछलियों और छोटी मछलियों को अलग कर एक पारदर्शी डिवाइडर में रखा। आधे डिवाइडर्स मे छेद बने थे, जिसके द्वारा पानी आगे-पीछे बह रहा था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने मछली को बैगनी रंग के डाई का इंजेक्शन दिया। इस इंजेक्शन के कारण मछली का पेशाब चमकीले और गाढ़े नीले रंग मे बदल गया।
जब मछलियों ने एक-दूसरे को देखा, तो उन्होनें अपने पंख फैलाए और डिवाइडर की ओर तेजी से तैरने लगीं। जिन मछलियों को एक मजबूत बैरियर की मदद से अलग किया गया था। वह इपने प्रतिद्वंदियों के पेशाब की पहचान नहीं कर सकें। अपना संकेत फैलाने के लिए उन्होनें ज्यादा पेशाब किया।
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