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''बैंड-एड'' के आविष्कार के पीछे है एक रोमांटिक कहानी

किसी भी अन्य आविष्कार की कहानियों से बिल्कुल अलग है ''बैंड-एड'' की कहानी।

बैंड-एड के आविष्कार के पीछे है एक रोमांटिक कहानी
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नई दिल्ली. आप सभी ने कभी ना कभी 'बैंड-एड' का उपयोग किया ही होगा। शरीर पर कहीं कट हो या घाव इससे हम डरते नहीं हैं क्योंकि हम जानते हैं कि इसके लिए 'बैंड-एड' सबसे अच्छी दवा है। अगर जल्दी से ठीक करना है तो बस बैंड-एड लगा लो। लेकिन हम में से कितने लोग जानते हैं कि यह बैंड-एड आया कहां से और किसके साथ आया? किसी भी अन्य आविष्कार की कहानियों से बिल्कुल अलग है बैंड-एड की कहानी। इसकी कहानी पूरी तरह से रोमांटिक है। लेकिन रोमांस विज्ञान की कहानियों से विपरीत, इसकी कहानी वास्तव में एक व्यक्ति के चारों ओर घूमती है।
अर्ल डिक्सन जो जॉनसन एन्ड जॉनसन कंपनी में काम किया करते थे और हाल ही में उन्होंने जोसफिन नाइट से शादी की थी। वे एक दूसरे के साथ बहुत ज्यादा प्यार करते थे। उन्होंने एक उत्साह के साथ अपने नए जीवन को एक साथ शुरू किया था।
डिक्सन की पत्नी अपने आप को अक्सर रसोई घर में काम करते वक्त घायल कर लेती थी। डिक्सन हमेशा से सोचता कि उसकी पत्नी के घरेलू काम की प्रकृति के कारण चोट पर बंधी पट्टी कुछ ही देर में निकल जाएगी।
अर्ल डिक्सन के मन में एक विचार ने जन्म लिया और उसने एक टेप की पट्टी के मध्य में एक छोटा सा धुंध का टुकड़ा लगा दिया। अगर उसकी पत्नी फिर से कहीं चोट लगा लेती है तो इस टेप के बांधने से वह आसानी से काम कर सकती है और टेप भी नहीं निकलेगा। अर्ल डिक्सन ने एक रेडीमेड पट्टी तैयार कर ली थी।
डिक्सन ने इसके बाद कई सारे बैंड-एड बना डाले ताकि उसकी पत्नी जब भी अपने आप को चोट पहुंचाए तो इसे लगा सके। ये बैंड-एड आसानी से नहीं निकलते थे।
कपास धुंध और चिपकने वाला टेप निर्मित करने वाली जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने जब डिक्सन और उसकी पत्नी के प्यार के बारे में सुना और उसके द्वारा एक बैंड-एड बनाने के बारे में जाना जिसे मात्र 30 सेकंड के अंदर चोट पर लगाया जा सकता था तो उसने डिक्सन से उसके बारे में पूछा।
यह नए आविष्कार का आइडिया बहुत अच्छी तरह से नहीं चला लेकिन साल 1924 में यह दुनिया भर में फला-फूला और अर्ल डिक्सन को कंपनी का उपाध्यक्ष बना दिया गया और निदेशक मंडल पर एक सीट भी दी गई ।

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