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यहां की महिलाएं अपने बच्चों के बजाय जानवरों को पिलाती हैं दूध

यहां के लोग जानवरों को अपने ही परिवार का सदस्य मानते हैं।

यहां की महिलाएं अपने बच्चों के बजाय जानवरों को पिलाती हैं दूध
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नई दिल्ली. आपने अक्सर सुना होगा की कई जन जातियां जानवरों को मार कर खा जाती हैं। लेकिन उनमें से ही कई ऐसे भी हैं जो उन्हीं जानवरों पर निर्भर रहती हैं। सुनकर यह आश्चर्य तो हुआ ही होगा कि कैसे कोई जन जाति जानवरों पर निर्भर हैं। इतना ही नहीं इस जनजाति की एक खास बात यह भी है कि ये जानवरों को अपना दूध पिलाते हैं।
ब्राजील देश के बारे में आपने सुना तो होगा ही, यहां के आदिवासी का रहन सहन कैसा है, कैसे रहते हैं ये लोग। लेकिन इनका रहन सहन, रिती रिवाज सभी कुछ अलग है। यहां के लोग जानवरों को अपने ही परिवार का सदस्य मानते हैं। यहां के जानवर भी इंसोनों की मदद करते हैं, उनको उचे पेड़ों से फल तोड़ कर देते हैं। इस जाती का नाम 'आवा' है।
दरअसल यहां कि महिलाएं जानवरों को अपना दूध पिलाकर बड़ा करती हैं। यहां लोग अपने बच्चे की तरह जानवरों को प्यार करते हैं। इन जनजातियों को ट्राइब्स के नाम से जाना जाता है।
आज से करीब 500 साल पहले इस जन जाति के लोगों की संख्या कई हजार थी लेकिन आज के समय में इन लोगों की संख्या घट कर 500 ही रह गई हैं। ये लोग पूरी तरह से जंगल पर निर्भर हैं। इनका सारा जीवन जंगल में विश्रित होता है। लेकिन इस समय आवा जन जाती के लोगों पर पूरी तरह खतरा मंडरा रहा है। इस बात को जानना मुश्किल है कि यहां के लोगों पर खतरा क्यों मंडरा रहा है।
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