Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ये हैं वे 5 प्रजातियां जो गिरगिट की तरह रंग बदलने में हैं माहिर

मेंढकों, छिपकलियों और मकड़ियों की भी कुछ प्रजातियां रंग बदलती है।

ये हैं वे 5 प्रजातियां जो गिरगिट की तरह रंग बदलने में हैं माहिर
X

नई दिल्ली. त्वचा का रंग बदलने के मामले में गिरगिट का कोई मुकाबला नहीं। लंबे समय से माना जाता रहा है कि सांप जैसे शिकारियों से बचने के लिए वे ऐसा करते हैं। लेकिन असल में अपनी अलग अलग भावनाओं जैसे आक्रामकता, गुस्सा, दूसरे गिरगिटों को अपना मूड दिखाने और इस माध्यम से संवाद करने के लिए भी वे रंग बदलते हैं।

गिरगिट की सभी प्रजातियां हर रंग में नहीं बदल सकती। यह कई बार दिन के समय पर निर्भर करता है। कई बार वे रंग नहीं केवल अपनी चमक बदल लेते हैं। खतरे की स्थिति में वह अपने रंग के साथ साथ आकार भी बदल लेते हैं। फूल कर अपना आकार बड़ा कर लेना भी इनका एक तरीका है।
गिरगिट के बहुत ज्यादा प्राकृतिक दुश्मन नहीं हैं। वह आराम से पेड़ों की टहनी पर बिना हिले बैठा रहकर अपने शिकार का इंतजार करता है। कीड़े मकोड़े दिखते ही जल्दी से अपनी लंबी सी जीभ फेंक कर उसे निगल लेता है। हरिभूमि आपको उन पांच प्रजातियों के बारे में बताने जा रहा है जो गिरगिट की तरह रंग बदलने में माहिर होती है।
1. जेबरा
जेबरा भी छलावरण की इस नैसर्गिक प्रतिभा का उपयोग करते हैं। काले और सफेद धारीदार जेबरा के आस पास अगर शेर आ जाए तो उसको भ्रमित करने के लिए वे झुंड में पास पास आ जाते हैं। ऐसे में शेर को कोई एक जानवर दिखाई नहीं पड़ता और वह चौंक जाता है।
2. लूपर
लूपर नामक यह कीड़ा धोखा देने में उस्ताद है। तितलियों के परिवार से आने वाला यह कीट वातावरण के हिसाब से खुद को बहुत खूबी से बदल लेता है। एक नजर में पेड़ की पतली सी शाखा की तरह लगने वाला लूपर अपने आपको पास के माहौल में मिला लेता है।
3. ऑक्टोपस
ऑक्टोपस की ये प्रजाति समुद्रतल पर खुद को बहुत खूबसूरती से छिपा लेती है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर यह अपने पास के किसी दूसरे समुद्री जीव, सांप, घोंघा या किसी और जैसा आकार और रंग भी अपना सकता है।
4. तितली
इस तितली को देखें जो अपने पंखों पर दो जोड़ी आंखें लेकर उड़ती है। जी हां, आंखों की इस डिजाइन के कारण वे किसी शिकारी को खाने लायक नहीं बल्कि खतरनाक दिखती हैं। इनके अलावा मोर के पंखों पर भी बड़ी बड़ी आंखों की नकल जैसे डिजाइन होते हैं जिससे वह अपने शिकारी को भ्रमित करने की कोशिश करता है।
5. होवरफ्लाई
नकल का सबसे अच्छा उदाहरण शायद होवरफ्लाई करती है। चटकीले पीले और काले रंग की धारियों वाला यह कीड़ा ततैया होने का दिखावा करता है। उसके दुश्मन डर जाते हैं क्योंकि जहरीला ततैया उन्हें डंक मार सकता है। यह उपाय होवरफ्लाई को शिकारियों से बचा लेता है।
प्रकाश के परावर्तन का खेल
गिरगिट के मामले में ऐसा नहीं होता प्रयोग के दौरान जिनेवा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को पता चला कि गिरगिट की त्वचा में फोटोनिक क्रिस्टल नामक अतिसूक्ष्म क्रिस्टलों की एक परत होती है। ये नैनो साइज के क्रिस्टल होते हैं। क्रिस्टलों की ये परत पिगमेंट कोशिकाओं के नीचे होती है।
यही परत प्रकाश के परावर्तन को प्रभावित करती है और गिरगिट का बदला हुआ रंग दिखाई पड़ता है। मिषेल मिलिनकोविच इसे समझाते हैं, "जब गिरगिट शांत होता है तो क्रिस्टल एक सघन नेटवर्क की तरह जमा हो जाते हैं और प्रकाश में मौजूद नीले तरंगदैर्घ्य को परावर्तित करते हैं। इसके उलट जब वो जोश में होता है तो नैनो क्रिस्टलों की परत ढीली पड़ जाती है, इससे पीला और लाल रंग परावर्तित होता है।"
वैज्ञानिकों के मुताबिक गिरगिट में नैनो क्रिस्टलों की एक और परत भी होती है। इसके क्रिस्टल पहली परत के मुकाबले ज्यादा बड़े होते हैं। बहुत तेज प्रकाश होने पर ये गिरगिट को गर्मी से बचाते हैं। गिरगिट के अलावा मेंढकों, छिपकलियों और मकड़ियों की भी कुछ प्रजातियां रंग बदलती है। वैज्ञानिकों को लगता है कि गिरगिट के रंग बदलने की प्रक्रिया समझने के बाद अब इन जीवों को भी बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलोकरें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story