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यहां मृतक परिजनों की आत्मा की शांति के लिए जलाए जाते हैं नोट

परिजनों को खुश देखने के लिए यहां के लोग उनकी मौत के बाद यह काम करते हैं।

यहां मृतक परिजनों की आत्मा की शांति के लिए जलाए जाते हैं नोट
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यूं तो पूरे भारत में पितरो की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, अर्पण किया जाता है। वहीं परिजनों की मृत्यु के बाद परलोक में उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी न हो एवं उनकी कृपा हमेशा बनी रहे, इसके लिए 15 दिनों का यह श्राद्ध पक्ष मनाया जाता है।

लेकिन विदेशों में भारत देश की तरह पितरो की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, अर्पण नहीं किया जाता। विदेशों में भी मृत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए कई तरह के आयोजन किए जाते हैं।

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पड़ोसी देश चीन और ताइवान के कुछ हिस्सों में भी पितरों के मोक्ष के लिए नोट जलाने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे परिजनों का नया जन्म बिना किसी परेशानी के होगा।

परिजनों को खुश देखने के लिए यहां के लोग उनकी मौत के बाद यह काम करते हैं। हालांकि, यह नकली नोट होते हैं, जिन्हें घोस्ट मनी कहते हैं और यह जॉस पेपर या खुरदरे बांस से बने होते हैं। आमतौर पर इनका रंग सफेद होता है, जो मृत स्वजन के प्रति संवेदना को दर्शाते हैं।

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इनके बीच में सोने या चांदी जैसे एक वर्गाकार फ्वॉयल चिपकाई जाती है और इसे धन-दौलत का सूचक माना गया है। घोस्ट मनी को आदर के साथ मिट्टी के बर्तन या किसी चिमनी में जलाया जाता है। एशिया में घोस्ट मनी की परम्परा करीब 1,000 वर्ष पुरानी है।

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