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53 साल की उम्र में पहली बार अपने पैर पर खड़ी हुई महिला, टूट गई थी कूल्हे की हड्डी

बिस्तर से गिरने के बाद से सीता सूद नाम की यह महिला चोटिल हो गई थी।

53 साल की उम्र में पहली बार अपने पैर पर खड़ी हुई महिला, टूट गई थी कूल्हे की हड्डी
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नई दिल्ली. छह महीने की उम्र में बिस्तर से गिरने के बाद हाल में अपने पूरे कूल्हे के प्रत्यारोपण के बाद एक महिला 52 साल की उम्र में पहली बार सीधी चल पा रही हैं।
बिस्तर से गिरने के बाद से सीता सूद नाम की यह महिला चोटिल हो गई थी। वह इतनी बुरी तरह गिरी थीं कि कूल्हे को जोड़ने वाली दायें जांघ की हड्डी टूट गई, जिसकी वजह से उसका दायां धड़ आठ सेंटीमीटर छोटा हो गया। बीएलके सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सर्जरी विभाग के सीनियर सलाहकार डॉ. राकेश महाजन ने कहा कि मरीज का बचपन में ऑपरेशन नहीं किया, जिसके कारण धड़ छोटा हो गया।
डॉ. महाजन ने बताया कि यह एक जटिल केस था। उन पर की गई जांच और एक्सरे में खिसके हुए हिप के साथ एसिटाबुलम और सर का पांच सेमी. से अधिक क्रेनियल माईग्रेशन दिखाई दिया। इसका अर्थ है कि उनका हिप पूरी तरह से खिसक गया था, क्योंकि कप और बॉल सॉकेट पांच सेमीमीटर ऊंचा हो गया था, जिससे पैर की पेशी छोटी हो गई थी।
फीमर का हेड (जांघ की हड्डी का सबसे ऊपरी हिस्सा) सॉकेट में लाना काफी मुश्किल था, क्योंकि पेल्विस को फीमर से जोड़ने वाला एसिटेबुलम भर गया था। इसलिए हमने एसिटेबुलम का फिर से निर्माण किया और फेमोरल ऑस्टियोटोमी (रिअलाईनमेंट करने के लिए हड्डी को सर्जरी द्वारा काटा जाना) की। हमने फेमोरल हेड ग्राफ्ट द्वारा एसिटेबलुम का पुर्ननिर्माण किया और हेड को घटाने के लिए फेमोरल ऑस्टियोटोमी की।
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