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केदारनाथ-बद्रीनाथ अब आसानी से जा सकेंगे, वर्षों पुराने रास्तों पर हो रहा है काम

आज से करीब 60-70 साल पहले श्रद्धालु पैदल चलकर बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम दर्शन पहुंचते थे। सड़कें बनती गईं और इन पैदल मार्गों का चलन कम होता गया या कहें कि सड़कें विलुप्त हो गईं।

केदारनाथ-बद्रीनाथ अब आसानी से जा सकेंगे, वर्षों पुराने रास्तों पर हो रहा है काम
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आज से करीब 60-70 साल पहले श्रद्धालु पैदल चलकर बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम दर्शन पहुंचते थे। सड़कें बनती गईं और इन पैदल मार्गों का चलन कम होता गया या कहें कि सड़कें विलुप्त हो गईं। लेकिन श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने फिर से उन्हीं सदियों पुराने मार्गों की खोज करने जा रही है।

सदियों वर्ष पहले उत्तराखण्ड के गढ़वाल के हिमालय के पहाड़ों के घने जंगलों के बीच पैदल रास्ता हुआ करता था इन्हीं रास्तों से चलकर आदि गुरू शंकराचार्य बद्रीनाथ में बद्रिकाश्रम ज्योर्तिपीठ और केदारनाथ में ज्योतिर्लिंग बनवाए थे। श्रद्धालु भी सदियों से इन्हीं रास्तों से चलकर यहां दर्शन-पूजन करने आते थे।

आधुनिकता की ओर जाते हुए हमनें सड़कें बनवाईं जिसके कारण इन सदियों पुराने पैदल रास्ते विलुप्त हो गए। श्रद्धालु भी समय, मेहनत और खर्च के नजरिए से इन मार्गों का त्याग कर दिए। बदरीनाथ और केदारनाथ के आधार शिविर गौरीकुंड तक सीधे सड़क की पहुंच है। अगले महिने शुरु हो रहे चारधाम यात्रा से पहले ही उत्तराखंड पुलिस की आपदा बल यूनिट राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) ने पुराने मार्गों को फिर से खोजने की शुरुआत की है।

राज्य के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि इस कार्य के लिए इंस्पेक्टर संजय उप्रेती के निर्देशन में 13 सदस्यों की टीम बनाई गई है। जिन्हें बद्रीनाथ और केदारनाथ के लिए रवाना कर दिया गया है। ये टीम खुद से पैदल रास्तों का खोज करेगी। इन टीम में महिला सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है।

पुलिस महानिदेश कुमार ने कहा कि केवल 70 साल पहले श्रद्धालु इन्हीं विलुप्त हुए रास्तों से गुजर कर बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम दर्शन करने जाते थे लेकिन सड़कें बन जाने के बाद ये पारंपरिक रास्ते खो गए।

13 सदस्यों की टीम ने अपना काम 20 अप्रैल से ही शुरु कर दी है। टीम ऋषिकेश के पास स्थित लक्ष्मणझूला होते हुए गंगा नदी के साथ-साथ करीब 160 किलोमीटर की दूरी तय कर रुद्रप्रयाग तक खोज करने पहुंच चुकी है। पुलिस इंसपेक्टर उप्रेती ने बताया कि यहां से हमारी टीम दो हिस्सों में बंट गई है। एक टीम बद्रीनाथ की ओर जा रही है जबकि दूसरी टीम अलग दिशा में स्थित केदारनाथ की ओर रवाना हो गई है। बदरीनाथ की टीम का संचालन उप्रेती कर रहे हैं।

दोनों टीमों ने अपने साथ जरुरत के सामानों के साथ-साथ प्राचीन साहित्य की किताबें भी ले गए हैं। जिससे लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिल सके। टीम जीपीएस का सहारा लेकर रास्ते को खोजने की कोशिश कर रही है। पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि हमारे इस अभियान में आस-पास के ग्रामीण व साधु-संत मदद कर रहे हैं।

वहीं पुलिस महानिदेशक ने बताया कि दोनों टीमों के लौटने के बाद ही कुछ बताया जा सकता है। अगर सदियों पुराने मार्गों को हमारी टीमें खोज लेती हैं तो यह एक उपलब्धी होगी और इससे उत्तराखंड के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। लोग एडवेंचेरियस पर्यटन का हिस्सा भी बन सकेंगे।

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