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गजब! दो टीचर ने जुगाड़ से बनाया थर्मा मीटर और एयर प्रेशर

राज्य से 18 जिलों के दो-दो गवर्मेंट साइंस टीचर को विज्ञान के क्षेत्र में कबाड़ से जुगाड़ कार्यक्रम के तहत पुरस्कृत किया गया।

गजब! दो टीचर ने जुगाड़ से बनाया थर्मा मीटर और एयर प्रेशर
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राज्य शासन द्वारा राज्य में पहली बार विज्ञान शिक्षकों को स्थानीय रूप से सुलभ न्यून लागत सामग्री का उपयोग कर विज्ञान शिक्षण में नवाचारी सहायक सामग्री बना कर उपयोग करने के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे राज्य से 18 जिलों के दो-दो गवर्मेंट साइंस टीचर को विज्ञान के क्षेत्र कबाड़ से जुगाड़ कार्यक्रम के तहत पुरस्कृत किया गया।

इसमें रायपुर शहर के दो टीचर नगर निगम गवर्मेंट उच्चतर माध्यमिक स्कूल मठपारा और बीपी पुजारी स्कूल राजातालाब की वर्षा जॉन ने कबाड़ से जुगाड़ कर एयर प्रेशर और थर्मामीटर तकनीक बच्चों और इस कार्यक्रम में प्रस्तुत किया है।

विक्रम कुमार त्यागी ने बताया कि इसके तहत ऐसी सामग्रियों को, जो हमारे कोई काम के नहीं होते। जिन्हें हम कबाड़ कहते हैं और हम उन्हें घर के बाहर फेंक देते हैं। ऐसे ही बेकार पड़ी चीजों से विज्ञान एवं अन्य विषयों की विषय वस्तु को विद्यार्थियों को स्पष्ट करने के लिए उन्हीं वस्तुओं का प्रयोग करते हैं।

इसमें पानी की एक खाली बोतल। जिसे पानी पीने के बाद फेंक देते हैं। उस खाली बोतल में यदि गर्म पानी डालें, उसके बाद उस गरम पानी को बाहर कर दें, कुछ देर के बाद हम देखते हैं कि वह पानी की बोतल अपने आप सिकुड़ता चला जाता है, ऐसा क्यों होता है। इसके पीछे विज्ञान की एक अवधारणा है।

की जब हम बोतल में गर्म पानी का प्रवेश करवाते हैं। वह बोतल के अंदर की हवा गरम होकर ऊपर उठती है और बोतल के बाहर हो जाती है। जिससे बोतल का वायुदाब कम हो जाता है। वायुमंडलीय दाब उससे अधिक होने के कारण वह बोतल में अपना दबाव दिखाता है।

इससे बोतल जल्द ही पिचक जाती है, इसके द्वारा हम आसानी के साथ पर्वतरोही द्वारा ऊपर जाने पर नाक से खून निकलने की घटना को हम समझा सकते हैं। इसमें ऊपर जाने पर वायुमंडलीय दाब कम हो जाता है, कोशिका का वायुदाब अधिक हो जाता है।

जिसके कारण नाक की कोशिका सबसे नाजुक होने के कारण फट जाती है और रक्त का प्रवाह होता है। उसी प्रकार दूसरे प्रयोग में भी एक खाली पड़ा प्लास्टिक की भरनी एक गुब्बारा और दो स्ट्रा की सहायता से वायुदाब को समझाया जा सकता है।

इस उपकरण में प्लास्टिक की बरनी को दो स्थानों में छेद कर दिए और दोनों स्थानों में एक-एक स्ट्रा लगा दिए। स्ट्रा में नीचे की ओर एक फुग्गा बांध दिए और दूसरे स्ट्रा को खाली रखें, उसके पश्चात जब बर्नी को बंद किया जाएगा और दूसरे स्ट्रा जिसमें गुब्बारा नहीं लगा हुआ है।

उसमें से यदि हवा को खींचा जाए व प्लास्टिक की बरनी की हवा को खींचा जाए, तो दूसरे स्ट्रा में लगा गुब्बारा फूल जाता है ऐसा क्यों होता है।

पूरी तरह साइंटिफिक है

इसके पीछे भी विज्ञान की अवधारणा छुपी हुई होती है, क्योंकि जैसे ही हम बरनी के हवा को बाहर खींचते हैं, बरनी के अंदर वायुदाब कम हो जाता है और जिसकी पूर्ति करने के लिए बरनी में लगा दूसरा स्ट्रा बाहरी वातावरण से वायु को खींचता है।

नतीजा गुब्बारा फूल जाता है, इस प्रकार का प्रयोग ऐसे तो सभी स्कूलों के लिए महत्वपूर्ण हैं, किंतु शासकीय स्कूलों में प्रयोगशाला एवं संसाधनों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए यह अति महत्वपूर्ण हो जाता है।

इस पर इस प्रकार के प्रयोग से विद्यार्थी आसानी के साथ विद्यार्थियों के विभिन्न विषय के विषय वस्तुओं में अपनी समझ विकसित करते हैं। उसमें रचनात्मक शक्ति का विकास होता है। वह जिज्ञासा के साथ विषय वस्तु को समझता है, उनकी एकाग्रता में भी वृद्धि होती है।

ऐसे सैकड़ों शिक्षण सामग्री बनाया जा सकता है और बच्चों को समझाया जा सकता है। थर्मामीटर को भी बड़ी आसानी से वर्षा जाॅन ने बड़ी ही बखूबी से बच्चों और बीआरसीसी के समक्ष पेश किया।

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