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वैज्ञानिकों की नई खोज: चबाने से मिलेगी बिजली, चार्ज कर सकेंगे कान की मशीन और गैजेट

प्रतिदिन चबाने से 580 जूल तक ऊर्जा उत्पादित की जा सकती है

वैज्ञानिकों की नई खोज: चबाने से मिलेगी बिजली, चार्ज कर सकेंगे कान की मशीन और गैजेट
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कना़डा. यहा के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा पट्टा बना कर तैयार किया है जो मुह में लगाने के बाद उसे चबाने से निकली ऊर्जा को बिजली में बदल देता है । वैज्ञानिकों का मानना है कि ठुड्ढी से लगाया जाने वाला यह पट्टा आने वाले दिनों में कान की मशीन और अन्य गैजेटों में इस्तेमाल बैटरियों को चार्ज कर सकता है। हालांकि इस्तेमाल किए जाने लायक ऊर्जा उत्पादन के लिए अभी इसकी क्षमता को बीस गुणा बढ़ाए जाने की ज़रूरत है।
वैज्ञानिकों का दावा है कि इस्तेमाल किए गए 'स्मार्ट पदार्थ' की परतें बढ़ाकर ऐसा किया जा सकता है । ये 'स्मार्ट पदार्थ' खिंचाव होने पर बिजली पैदा करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जबड़ों की चाल से प्राकृतिक ऊर्जा निकाली जा सकती है । साथ ही बताया कि चबाने के दौरान हमारी ठुड्ढी सबसे ज़्यादा खिंचती है। अगर आपने कोई सुरक्षा गियर पहन रखा है तो ठुड्ढी से लगने वाले पट्टे से काफ़ी ऊर्जा बनाई जा सकती है।
इस सिद्धांत पर शोधकर्ताओं ने एक स्मार्ट पदार्थ से एक पट्टा बनाया जो ठुड्ढी से बांधने पर एक मिनट तक च्युईंग गम चबाने से 18 माइक्रोवॉट ऊर्जा उत्पादन करने में कामयाब रहा।चबाने से प्रतिदिन 580 जूल तक ऊर्जा उत्पादित की जा सकती है । पट्टे में पीज़ेइल्केट्रिक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया। हालांकि 18 माइक्रोवॉट ऊर्जा बहुत ज़्यादा नहीं है। कान की मशीन को चलाने के लिए भी इससे बीस गुणा ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है । यह खबर इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िजिक्स की जर्नल 'स्मार्ट मैटेरियल्स एंड स्ट्रक्चर्स' में प्रकाशित हुई है।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्या है पीज़ेइल्केट्रिक पदार्थ -
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