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ये हैं बिना कंक्रीट और सीमेंट के सौ प्रतिशत प्राकृतिक पुल, देखिए तस्वीरें

मेघालय में पेड़ों की टहनियों को आपस में जोड़कर पुल तैयार किए जाते हैं।

ये हैं बिना कंक्रीट और सीमेंट के सौ प्रतिशत प्राकृतिक पुल, देखिए तस्वीरें
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शिलांग. भारत के उत्तर पूर्व में स्थित राज्य मेघालय अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। लेकिन एक चीज यहां काफी महत्व रखती है। वो हैं यहां के पुल। जी हां दुनियाभर में ब्रिजओवर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन यहां पेड़ों की टहनियों को आपस में जोड़कर पुल तैयार किए जाते हैं। दक्षिण मेघालय के नोंगरियात गांव में ग्रामीणों को नदियों-नालों को पार करने में मदद करने वाले पेड़ों की जड़ों से निर्मित होने वाले पैदल पुल राज्य में आकर्षण का केंद्र बन हैं। पर्यटकों की ओर से इन पुलों को जीवित पैदलपुल नाम दिया गया है। इन पुलों को बनने में 12 से 15 वर्ष का समय लगता है। ये पुल बिना किसी सरकारी सहायता के अकेले ग्रामीणों के प्रयासों का नतीजा हैं। इस तरह के पुल अधिकतर राज्य के दक्षिणी ढलान वाले इलाकों में देखने को मिलते हैं। इन पुलों की लंबाई 50 मीटर तक हो सकती है। इनकी मदद से ग्रामीण मॉनसून के दिनों में नदियों की तेज धाराओं को आसानी से पार कर लेते हैं।
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नीचे की स्लाइड्स में देखिए, मेघालय के प्राकृतिक पुलों की झलक-

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