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अजब गजब: खतरे में आमों की मल्लिका ''नूरजहां''

पिछले एक दशक में मौसम परिवर्तन से मशहूर नूरजहां आम की फसल पर बुरा असर पड़ रहा है।

अजब गजब: खतरे में आमों की मल्लिका नूरजहां
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क्या आप सोच सकते हैं कि दो किलो के एक आम की कीमत 500 रुपये तक हो सकती है और उसके लिए भी तभी बुकिंग हो जाती है जब वह पेड़ पर लगे-लगे पकने लगता है। जी हां, चाैंकिये मत ये सच है और इस आम का नाम है नूरजहां।

यह आम न केवल अपने स्वाद, मिठास के कारण मशहूर है बल्कि अपने वजन के कारण भी इसने अच्छी-खासी शोहरत हासिल कर रखी है। अपने भारी वजन व मिठास के कारण आमों की मल्लिका के रुप में देश सहित विदेशों में भी मशहूर‘नूरजहां' खतरे में है।

आम की यह खास किस्म जलवायु परिवर्तन की त्रासदी झेलते हुए अपने वजूद के लिये जूझ रही है और इस बार भी उसके दुर्लभ फलों का वजन घटने का अंदेशा है। अफगानिस्तानी मूल की मानी जाने वाली इस आम की प्रजाति के पेड़ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाये जाते हैं।

मध्य प्रदेश के महानगर कहलाने वाले इंदौर नगर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा में इस प्रजाति की खेती के विशेषज्ञ इशाक मंसूरी बताते हैं कि उनका खानदान पिछले कई दशकों से इस आम के पेड़ों को लगाकर इनका व्यापार कर रही है, लेकिन पिछले एक दशक में मौसम परिवर्तन से मशहूर नूरजहां आम की फसल पर बुरा असर पड़ रहा है।

मौसम की यह मार इस साल भी जारी रही, जब जनवरी में कुछ दिनों तक आकाश में बादल छाये रहने के दौरान नूरजहां के पेड़ों पर आए बौर यानि आम के फूल धीरे-धीरे झड़ गए। हालांकि, उन्होंने बताया कि ‘नूरजहां' के पेड़ों पर इसके कुछ दिनों बाद दोबारा बौर आए लेकिन इनमें पहले जैसी बात नहीं थी जिससे इसकी फसल कमजोर हो गयी।

मंसूरी ने बताया कि पिछले साल ‘नूरजहां' के सबसे बड़े फल का वजन 3.2 किलोग्राम रहा लेकिन इस बार इसके फल का अधिकतम वजन दो किलोग्राम तक रहने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि ‘नूरजहां' के पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरु होते हैं और इसके फल जून तक पककर तैयार होते हैं।

मंसूरी ने बताया कि एक जमाना था, जब ‘नूरजहां' के फलों का वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच रहता था लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते इनका वजन लगातार गिर रहा है। उन्होंने बताया कि कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ‘नूरजहां' के केवल तीन पेड़ बचे हैं जो दशकों पुराने हैं।

इनकी उत्पादकता भी अब बेहद कम रह गयी है। ‘नूरजहां' के फलों की बेहद सीमित संख्या के कारण शौकीन लोग तब ही इनकी ‘बुकिंग' कर लेते हैं, जब ये डाल पर लटककर पक रहे होते हैं। मांग बढ़ने पर इस आम प्रजाति के केवल एक फल की कीमत 500 रुपये तक भी पहुंच जाती है।

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