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गजब ! मेल फीमेल के मेल के बगैर पैदा होगा चूजा वाला अंडा

चूजा निकलने वाले अंडे के लिए अब मेल फीमेल के मेल की जरूरत नहीं होगी। प्रदेश के एकलौते दुर्ग स्थित कुक्कुट पालन केंद्र में इसके लिए अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। वहां मुर्गे के स्पर्म संग्रहण से लेकर कृत्रिम गर्भाधान व अंडे से चूजे निकलने के लिए हेचरी की पूरी व्यवस्था होगी।

गजब ! मेल फीमेल के मेल के बगैर पैदा होगा चूजा वाला अंडा
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चूजा निकलने वाले अंडे के लिए अब मेल फीमेल के मेल की जरूरत नहीं होगी। प्रदेश के एकलौते दुर्ग स्थित कुक्कुट पालन केंद्र में इसके लिए अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। वहां मुर्गे के स्पर्म संग्रहण से लेकर कृत्रिम गर्भाधान व अंडे से चूजे निकलने के लिए हेचरी की पूरी व्यवस्था होगी। आगामी कुछ महीनों में इसका काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद चूजे निकलने वाले अंडे का प्रतिशत भी बढ़ जाएगा।

दुर्ग-उतई मार्ग पर स्थित कुक्कुट पालन केंद्र में मुर्गी, टर्की, बटेर, बतख का पालन व उसके अंडे से चूजे तैयार करने का काम होता है। सरकारी स्तर पर ऐसा करने वाली यह प्रदेश की एकलौती संस्था है। यहां पैदा होने वाले चूजे को शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत पोल्ट्री व्यवसाय करने वाले किसानों को अनुदान पर वितरित किया जाता है। चूजे निकालने वाले अंडे के लिए केंद्र में पक्षियों का पालन होता है।

वहां मेल फीमेल को साथ रखते हैं। उनसे प्राप्त अंडे को हेचरी में एक निश्चित तापमान में रखकर चूजा निकाला जाता है। मेल फीमेल के मेल से प्राप्त अंडे को म कहा जाता है। उसमें चूजा निकलने वाले अंडे का प्रतिशत 60 से 70 प्रतिशत होता है। शेष अंडे का उपयोग खाने के लिए होता है।

केंद्र में वर्तमान में 5 हजार मुर्गियों को एक साथ पालने की क्षमता है। आम लोगों में यह भ्रांतियां है कि अंडे के लिए मुर्गियों को इंजेक्शन दिया जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पशु चिकित्सकों के अनुसार पक्षियों में अंडा बनना स्वाभाविक प्रक्रिया है। उस अंडे को सिर्फ खाने के उपयोग में लाया जा सकता है। उससे चूजे नहीं निकल सकते। फार्टिलाइज्ड एग से ही चूजे निकल सकते हैं।

प्रदेश के आधे जिलों में होती है आपूर्ति

प्रदेश में पोल्ट्री का व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग के कुक्कुट पालन केंद्र से प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में चूजे की आपूर्ति होती है। मांग की तुलना में चूजे का उत्पादन कम होने से यहां नई अधोसंरचना का विकास कर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मुर्गियों के कृत्रिम गर्भाधान से मेल को साथ रखे बगैर फार्टिलाइज्ड अंडे प्राप्त किए जा सकेंगे। इससे चूजा निकलने वाले अंडों का प्रतिशत बढ़ जाएगा और चूजे के उत्पादन में वृद्धि होगी।

चल रही टेंडर की प्रक्रिया

मुर्गियों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए अधोसंरचना तैयार है। एआई (आर्टिफिशियल इनफ्रीमनेशन) किट के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। एआई किट उपलब्ध होने के बाद यहां मेल के बगैर चूले वाले अंडे प्राप्त किए जा सकेंगे। इससे कम लागत में अधिक चूजे उत्पादन में मदद मिलेंगे। (डॉ. एसके यादव, प्रभारी, कुक्कुट पालन केंद्र)

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