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इस चट्टान की दरारों से पिंडदान लेने आती हैं आत्माएं, रहस्य जानकार हो जाएंगे हैरान

बिहार के गयाजी में एक रहस्यमयी चट्टान प्रेतशिला है। जहां प्रेतलोक से आत्माएं आती हैं और अपना पिंडदान लेकर वापस परलोक चली जाती हैं। आइये जानते हैं इस रहस्य के बारे में...

इस चट्टान की दरारों से पिंडदान लेने आती हैं आत्माएं, रहस्य जानकार हो जाएंगे हैरान
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Mysterious Rock Pretshila Spirits Come Gaya Dham

आपने अक्सर किस्से-कहानियों में या घर के बड़े बुजुर्गों से आत्माओं व प्रेत आत्माओं के बारे में जरूर सुना होगा। कुछ लोगों का कहना है कि ये सब सिर्फ हमारे दिमाग का वहम है। वहीं अगर साइंस की बात करें तो आज विज्ञानिक भी धरती पर आत्माओं के अस्तित्व को मान चुके हैं। कहते है की जब इंसान की मृत्यु होती है। तो उसकी आत्मा की शांति और मृत व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो इसके लिए उसके परिवार वाले अंतिम संस्कार करते हैं और हर साल श्राद्धपक्ष में पिंडदान करते हैं। अगर आपसे कहा जाए की मरने के बाद भी आत्माएं प्रेतलोक से इस पृथ्वी पर अपने मोक्ष प्राप्ति के लिए आती हैं तो क्या आप विश्वास करेंगे शायद नहीं.... लेकिन ऐसा माना जाता है कि बिहार के तीर्थ स्थल "गयाजी" में एक ऐसी रहस्यमयी चट्टान 'प्रेतशिला' है जिनकी दरारों से आत्माएं प्रेतलोक से यहां पिंडदान लेने आती हैं।

तीर्थ स्थल गयाजी

प्रकृति ने इस पृथ्वी को सुन्दरता के साथ रहस्य और रोमांच भी दिया है ऐसे ही रहस्यों और रोमांच से भरा एक स्थान बिहार का 'गयाजी' भी है जो अपने आप में बेहद विचित्र और डरावना है। 'गयाजी' हिन्दुओं का तीर्थ स्थल भी है ऐसा माना जाता है कि यहां हर साल श्राद्ध पक्ष में पिंड ग्रहण करने के लिए पितरों का आगमन होता है और पिंडदान लेकर वे परलोक वापस चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितरों को पिंडदान करने से उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रेतशिला का रहस्य




बिहार में मौजूद गयाधाम को 'मोक्ष की धरती' भी कहा जाता है। गयाधाम में एक रहस्यमयी चट्टान है जिसे 'प्रेतशिला' के नाम से जाना जाता है। श्राद्ध पक्ष में इस चट्टान पर ही लोग पिंडदान करते हैं क्योंकि उनका ऐसा मानना है कि इस चट्टान का सम्बन्ध सीधे प्रेतलोक से है जहां आत्माएं रहती हैं।

गरुण पुराण में प्रेतशिला का महत्व

प्रेतशिला के बारे में गरुण पुराण में कहा गया है कि गयाधाम में मौजूद प्रेतशिला की दरारों से ही पिंडदान लेने के लिए पितरों का आगमन होता है और इन्ही दरारों से पिंडदान ग्रहण करके पितृ वापस परलोक लौट जाते हैं। लोगों की ऐसी मान्यता है कि चट्टान की दरारों से आत्माएं प्रेतलोक से आती-जाती रहती हैं।

गयाधाम एक वरदान

मान्यताओं के अनुसर, गयाधाम में पितरों के पिंडदान करने के पीछे एक पौराणिक कथा है जिसमें बताया गया है की यह गयानगरी भगवन विष्णु के भक्त 'गयासुर' के शरीर पर बसी हुई है। गयासुर ने भगवन विष्णु से यह वरदान मांगा था कि जिस भी इंसान की मृत्यु होती है और उसका पिंडदान अगर गयाधाम में किया जाए, तो उसे नरक में नही जाना पड़ेगा। इसी वरदान के कारण ही यहां पितरों का श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है ताकि उनकी आत्मा को मुक्ति मिल जाए।

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