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आश्चर्यजनक ! यहां लाखों प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर

संयुक्त राष्ट्र ने एक आकलन रिपोर्ट में कहा, मानवता उसी प्राकृतिक दुनिया को तेजी से नष्ट कर रही है, जिस पर उसकी समृद्धि और अंतत: उसका अस्तित्व टिका है। 450 विशेषज्ञों द्वारा तैयार 'समरी फॉर पॉलिसीमेकर' रिपोर्ट को 132 देशों की एक बैठक में मान्यता दी गई।

आश्चर्यजनक ! यहां लाखों प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर

संयुक्त राष्ट्र ने एक आकलन रिपोर्ट में कहा, मानवता उसी प्राकृतिक दुनिया को तेजी से नष्ट कर रही है, जिस पर उसकी समृद्धि और अंतत: उसका अस्तित्व टिका है। 450 विशेषज्ञों द्वारा तैयार 'समरी फॉर पॉलिसीमेकर' रिपोर्ट को 132 देशों की एक बैठक में मान्यता दी गई।

बैठक की अध्यक्षता करने वाले रॉबर्ट वाटसन ने कहा कि वनों, महासागरों, भूमि और वायु के दशकों से हो रहे दोहन और उन्हें जहरीला बनाए जाने के कारण हुए बदलावों ने दुनिया को खतरे में डाल दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार जानवरों एवं पौधों की 10 लाख प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं।

इनमें से कई प्रजातियों पर कुछ दशकों में ही विलुप्त हो जाने का खतरा मंडरा रहा है। आकलन में बताया गया है, ये प्रजातियां पिछले एक करोड़ वर्ष की तुलना में हजारों गुणा तेजी से विलुप्त हो रही हैं। जिस चिंताजनक तेजी से ये प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं,

उसे देखते हुए ऐसी आशंका है कि छह करोड़ 60 लाख वर्ष पहले डायनोसोर के विलुप्त होने के बाद से पृथ्वी पर पहली बार इतनी बड़ी संख्या में प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा है।

जर्मनी में 'हेल्महोल्त्ज सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल रिसर्च' के प्रोफेसर और संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर अंतरसरकारी विज्ञान-नीति मंच के सह अध्यक्ष जोसेफ सेटल ने कहा कि लघुकाल में मनुष्यों पर खसंयुक्त राष्ट्र ने एक आकलन रिपोर्टसंयुक्त राष्ट्र ने एक आकलन रिपोर्टतरा नहीं है। उन्होंने कहा, दीर्घकाल में, यह कहना मुश्किल है।

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