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पानी पर घंटों दौड़ता रहा ये आदमी, देखें वायरल वीडियो

लामर के विश्विद्यालय के एक छात्र ने पानी पर दौड़ने का फोर्मूला बना ही डाला। अब लोग पानी पर चलने जैसा खेल देखने के साथ अपने सपने को पूरा कर पाएगें।

पानी पर घंटों दौड़ता रहा ये आदमी, देखें वायरल वीडियो
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आपने अपनी जिंदगी में कभी ना कभी पानी पर चलने का सपना तो देखा ही होगा? और ऐसा करने के लिए कई प्रयास भी किए होंगे। लेकिन इसके लिए कई वैज्ञानिकों ने भी कई प्रयास किए, सब नाकाम हो गए। फिर इसके बाद पानी पर चलने का अहसास करवाने के लिए कांच के गिलास का इस्तेमाल भी किय़ा गया।

कभी ना देखा होगा और ना सुनी होगी, हैरत करने वाला ये नजारा.. हमने कहानियों में भागवान या फरीशतो के पास पावर से कुछ भी करने के बारे में सुनाते आए है, साथ ही पानी पर चलने और उड़ने बारे में सुना है, लेकिन असल जिंदगी में क्या कभी किसी ने एक आदमी को पानी पर चलते भागते देखता है? जी हां जितनी ये बात सुन कर आपको हैरत हो रही है, मगर वीडियों देख आप सोचने पर मजबूर हो जाएगें।
आपको बता दें पानी पर चलने जैसे चमत्कार को पूरा करने का प्रयास लामर के विश्वविद्यालय के एक छात्र ने की। इस खोज को पूरा करने के लिए बार-बार कोशिश की गई, लेकिन आखिरकार 2018 में सफलता हासिल हुई।

इस बच्चे ने किया कमाल

इस छात्र ने घरेलू चीजों का उपयोग किया। जिसमें मकई और स्टार्च का इस्तेमाल कर इसका पाउडर बनाया। इससे एक अजीबो-गरीब तरल पदार्थ के रूप में बनकर आया। इस पानी पर चलना ही नहीं बल्कि डांस और बाइक भी गुजारी जा सकती हैं। आपको बता दें इस फोर्मूले से खेल के तौर पर खेला जा सकता है, साथ ही कई तरह की चीजे भी की जा सकती है।
इसको बनाने का फोर्मूला
इसको बनाने के लिए विज्ञान का सहारा लिया गया है, मक्का को दो हिस्से में मलाकर उसमें एक भाग स्टार्च को पानी में मिलाए गया और फिर ये नजारा विश्वास से परे था। जब ये पदार्थ से इसका मिक्चर बनता है, तो गैर-न्यूटोनियन तरल के गुण दिखाने लगता है, जब इस पर चलते वक्त कम भार डालते हैं, तो तरल पानी की तरह हिलने लगता है।

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आसान तरीके से समझाया इस वैज्ञानिक ने

इसके पीछे का विज्ञान समझना आसान नहीं है। लेकिन टेक इनसाइडर ने इसे बड़े ही आसान शब्दों में बताया है। उन्होंने बताया कि जब एक जगह पर रूकी हुई चीज पर हल्का बल लगता है, कण अपनी जगह पर रहकर इधर-उधर भागते हैं। इसलिए स्लाइड की तरह वस्तु काम करती है, क्योंकि यह एक तरल में होती है। कणों को जाने की जगह ना मिलने के कारण ऑब्जेक्ट बंद हो जाता है और यह ठोस तरह की तरह दिखाई पड़ती है।

गैर-न्यूटोनियन तरल पदार्थ में चिपचिपाहट होती है आमतौर पर दूसरे तरल पदार्थों में चिपचिपाहट नहीं महसूस होती। अगर इस फोर्मूले को पूल में भरे हुए पानी में इस्तमाल किया जाता है तो इसके लिए 900 किग्रा कॉर्नस्टार्च की आवश्यकता होती है। फिर पानी जैसा दिखने वाला लचीला पर्दाथ तैयार हो जाता है, इसके बाद उसका चमत्कार दिखना शुरू हो जाता है।

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