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यहां शादी के लिए बिकते हैं दूल्हे, करोड़ों में लगती है बोली

लड़को की बोली लगती हैं और बेटियों के लिए मां-बाप खरीद कर भी ले जाते हैं।

यहां शादी के लिए बिकते हैं दूल्हे, करोड़ों में लगती है बोली
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क्या आप सोच सकते हैं कि कहीं कोई लड़का शादी के लिए बिकता होगा। जी हां आप शायद हैरान हो जाएं लेकिन ये सच है “ यहां दूल्हा बिकता है”। भारत एक ऐसा देश है जहां सच में दूल्हे बिकते हैं। यहां लड़को की बोली लगती हैं और बेटियों के लिए मां-बाप खरीद कर भी ले जाते हैं।

जी हां, ये बात सौ फीसदी सही है कि दूल्हों की भी सौदेबाजी होती है। दरअसल बिहार के मिथिलांचल यानी मधुबनी जिले में दूल्हों की मंडी लगती है। दूल्हों की इस मंडी को कहा जाता है सौराठ सभा यानी दूल्हों का मेला लोग इसे सभागाछी के नाम से भी जानते हैं।

मैथिल ब्राह्मणों के इस मेले में देश-विदेश से कन्याओं के पिता योग्य वर का चयन करके विवाह करते हैं। इतना ही नहीं यहां योग्यता के हिसाब से दूल्हों की सौदेबाजी भी होती है।

9 दिनों तक चलने वाले इस मेले में पंजिकारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यहां जो संबंध तय होते हैं, उसे मान्यता पंजिकार ही देते हैं।

पंजीकरण में पिता पक्ष और ननिहाल पक्ष के 7 पीढ़ी तक के संबंधों को देखा जाता है। किसी तरह का संबंध रहने पर वर-कन्या का विवाह नहीं होता है, क्योंकि पडितों के हिसाब से उनकी नाड़ी समान होती है।

इस मामले में पंजिकार वीएन झा बताते हैं कि यह मेला लगभग 700 साल पहले शुरू हुआ था। साल 1971 में यहां लगभग 1.5 लाख लोग विवाह के समंबंध में आए थे लेकिन वर्तमान में आने वालों की संख्या काफी कम हो गई है।

इस मेले के बारे में लोग बताते हैं कि राजा हरि सिंह देव ने दहेज प्रथा को रोकने के लिए इस मेले की शुरुआत की थी, लेकिन बाद में इस मेले में लड़की पक्ष वाले वर की योग्यता के हिसाब से मूल्य निर्धारित करने लगे।

इस वजह से इसका महत्व कम होने लगा है और आज ये मेला अपनी आखिरी सांसे गिन रहा है।

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