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भगवान राम और माता सीता के धरती पर होने के मिले ''साक्षात प्रमाण''

भगवान राम और माता सीता के धरती पर होने के प्रमाण अब भी साक्षात मौजूद हैं। प्राचीन और प्रसिद्ध नगरी में स्थित एक मंदिर है जो माता सीता के लिए प्रसिद्ध है और इसे कनक भवन के नाम से जाना जाता है।

भगवान राम और माता सीता के धरती पर होने के मिले साक्षात प्रमाण
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भगवान राम और माता सीता के धरती पर होने के प्रमाण अब भी साक्षात मौजूद हैं। इस प्राचीन और प्रसिद्ध नगरी में स्थित एक मंदिर है जो माता सीता के लिए प्रसिद्ध है और इसे कनक भवन के नाम से जाना जाता है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि ओरछा के राजा अब भी राजा राम ही माने जाते हैं। कहा जाता है कि प्रतिदिन संध्याकाल में यहां आते हैं और सुबह होते ही चले जाते हैं। इस वजह से यहां संध्या वंदन, पूजन आरती का विशेष महत्व है। ठीक इसी प्रकार माता सीता से जुड़ाव होने के कारण ओरछा के समान ही इस स्थान की भी अलग ही मान्यता है।

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इसके संबंध में बताया जाता है कि ये विवाह के समय माता सीता को उपहार में प्राप्त हुआ था। कनक भवन माता सीता को उपहार स्वरूप कैकेयी ने दिया था। जब जनक नंदनी वैदेही माता सीता भगवान राम के साथ ब्याह कर अयोध्या आईं तो कैकेयी उन्हें देखकर बहुत ही प्रसन्न हुईं। उनकी सुंदरता और मन को मोह लेने वाले सुंदर स्वरूप पर वह मोहित हो गईं।

कहा जाता है कि तभी कैकयी ने अपना स्नेह व्यक्त करने के लिए नववधु देवी सीता को मुंह दिखाई में उपहार में कनक भवन दे दिया। कैकयी सभी पुत्रों में भगवान राम को अधिक प्रेम करती थी, वह उनके सबसे अधिक प्रिय पुत्र थे।

ऐसे में प्रिय पुत्र की पत्नी भी कैकेयी को अत्यधिक प्रिय थी। इसलिए उसने सबसे अच्छा उपहार देने का निर्णय किया और कनक भवन की भेंट वैदेही को दी। इस स्थान के संबंध में बताया जाता है कि 1891 में इसकी पुर्नस्थापना करायी गई थी।

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