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सबसे बड़ी दूरबीन के निर्माण के लिए भारत तैयार, खुलेंगे ब्रह्माण्‍ड के कई राज

भारत को इस परियोजना में जापान, चीन, कनाडा और अमेरिका हवाई द्वीप पर इस दूरबीन परियोजना में भारत का सहयोग करेंगे।

सबसे बड़ी दूरबीन के निर्माण के लिए भारत तैयार, खुलेंगे ब्रह्माण्‍ड के कई राज
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नई दिल्‍ली. भारत अब तक की सबसे बड़ी दूरबीन के निर्माण के लिए सॉफ्टवेयर, महत्वपूर्ण दर्पण और नियामक प्रणाली उपलब्ध कराएगा। इस वैश्विक परियोजना में अमेरिका, कनाडा, चीन और जापान आदि भी शामिल हैं। तीस मीटर की है। जो आठ मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर होगा। यह दूरबीन हवाई द्वीप में मौना के शिखर से बस थोड़ा सा नीचे माउंट एवरेस्ट से आधी उंचाई पर लगेगी। यह खगोल विज्ञान की दृष्टि से सर्वथा अनुकूल स्थानों में से एक है जहां से कई रातों को स्पष्ट आकाश और स्थिर माहौल दिखाई देता है। यह दुनिया में ऑप्टिकल इंफ्रारेड उन्नत सबसे बड़ी वेधशाला होगी। भारत की भूमिका नियामक प्रणाली और सॉफ्टवेयर तैयार करना होगी जो आंकड़े का संग्रहण करेगा।

भारत करीब 92 पॉलिश किए दर्पण प्रदान करेगा। इस परियोजना से जुड़ी भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान की वैज्ञानिक जी सी अनुपमा ने कहा, दर्पण की मोटाई 44 मिलीमीटर है। जापान उसके लिए शीशे देगा। पॉलिश करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि सटीकता के लिए सतह को चिकना करना होता है और खुरदुरापन मिटाना होता है। उसके लिए होसुर में एक विशेष केंद्र बनाया गया है। उन्होंने कहा, ‘प्रारंभ में, हम साल में दो दर्पण बनाएंगे। इसके लिए प्रौद्योगिकी हासिल करने के बाद हर पखवाड़े में एक दर्पण तैयार करेंगे।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, क्‍या कहते हैं वैज्ञानिक -
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