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गरीबी का रामबाण इलाज इस गांव के पास

भारत और चीन की सीमा का आखिरी गांव है। जो गरीबो के लिए ऐसी दवा और इलाज करता है जो बहुत ही कारगार रामबाण उचार करता है

गरीबी का रामबाण इलाज इस गांव के पास
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अपने ही देश में एक ऐसा गांव होने का दावा किया जा रहा है जो गरीबी का रामबाण इलाज कर सकता है। कहते हैं कि लंबे समय से चीन भी इस गांव पर डोरे डाल रहा है। भारत-चीन सीमा पर स्थित यह भारतीय सीमा का अंतिम गांव है।
पवित्र बदरीनाथ धाम से 3 किमी आगे भारत और तिब्बत की सीमा स्थित इस यह गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र देव के नाम पर पड़ा था। कहते हैं कि इस गांव के बारे में जिसे पता चला वह वहां गया और फिर अमीर बन गया।
उत्तराखंड से लगी चीन की सीमा पर स्थित इस गांव के बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां आता है उसकी गरीबी दूर हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि व्यक्ति के यहां एक बार आने पर वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
समुद्रतल से 10,248 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह भारतीय सीमा का अंतिम गांव है। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के उपाध्यक्ष डॉ. नंद किशोर के मुताबिक माणिक शाह नामक एक व्यापारी था, जो शिव का बहुत बड़ा भक्त था।
एक बार व्यापारिक यात्रा के दौरान लुटेरों ने उसका सिर काटकर कत्ल कर दिया। इसके बाद भी उसकी गर्दन शिव का जाप कर रही थी। उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव ने उसके गर्दन पर वराह का सिर लगा दिया।
,इसके बाद माना गांव में मणिभद्र की पूजा की जाने लगी। शिव ने माणिक शाह को वरदान दिया कि माणा आने पर व्यक्ति की दरिद्रता दूर हो जाएगी। डॉ नंदकिशोर के मुताबिक मणिभद्र भगवान से बृहस्पतिवार को पैसे के लिए प्रार्थना की जाए, तो अगले बृहस्पतिवार तक मिल जाता है।
इस गांव में आने पर व्यक्ति स्वप्नदृष्टा हो जाता है, जिसके बाद वह होने वाली घटनाओं के बारे में जान सकता है। माणा से 24 किमी दूर भारत-चीन सीमा है।

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