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गजब! यहां लोगों को होती है ऐसी बीमारी जिसे दवा या दुआ नहीं बल्कि ठीक करती है मछली

अक्सर जब कोई इंसान लंबी बिमारी से ग्रसित होता है, तो वह किसी भी हालत में जल्दी से जल्दी ठीक होने की कोशिश करता है। जिसके चक्कर में वह तरह-तरह की बाबाओं के पास चला जाता है।

गजब! यहां लोगों को होती है ऐसी बीमारी जिसे दवा या दुआ नहीं बल्कि ठीक करती है मछली
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अक्सर जब कोई इंसान लंबी बिमारी से ग्रसित होता है, तो वह किसी भी हालत में जल्दी से जल्दी ठीक होने की कोशिश करता है। जिसके चक्कर में वह तरह-तरह की बाबाओं के पास चला जाता है।
ऐसे लोग बिमारी से छूटकारा पाने के लिए अंध्विश्वासी तक हो जाते है और ऐसी-ऐसी चीज करने लगते है, जिसके बारे में अगर आपके पता चलेगा तो आप भी हैरान रह जाएंगे।
आंध्रप्रदेश के हैदराबाद के नामपल्‍ली इलाके में एक बिमारी को दूर करने के लिए एक काफी मशहूर उपचार पद्धति चलती आ रही है और हर साल यहां पर जून के महीनें में लगभग 5000 से भी ज्यादा लोग पहुंचते हैं।
बता दें नामपल्ली इलाके में जिंदा मछली को मुंह के अंदर डालकर लोगों का इलाज किया जाता है, जिसे "फ़िश मेडिसिन ट्रीटमेंट" का नाम दिया गया है। इस "फ़िश मेडिसिन ट्रीटमेंट का प्रयोग अस्थमा के मरीजों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
इस ट्रीटमेंट को करते समय मरीज के गले में करीब पांच सेंटीमीटर (दो इंच) लंबाई वाली मुरेल मछली को डाला जाता है। ऐसा करने से मरीज का गला पुरी तरह से साफ हो जाता है, जिसके बाद मरीज को सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
बताया जाता है कि इस इलाज को बैथिनी गौड़ परिवार करता हुआ आ रहा है। सन 1845 में बैथिनी परिवार को इस इलाज का पता एक साधू से मिला था। बैथिनी परिवार आज भी इस उपचार के मुख्य फार्मूला का जिक्र किसी के सामने नहीं करता हैं।

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