Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

इस विशाल नहर में हर दिन चलते हैं हजारों जहाज, इससे गुजरने पर घट जाती है करीब 12875 किलोमीटर की दूरी

नहर को पार करने में ही जहाजों को लग जाता है 10 घंटे से भी अधिक समय। दुनिया में सबसे बडी नहरों में है इसका नाम

इस विशाल नहर में हर दिन चलते हैं हजारों जहाज, इससे गुजरने पर घट जाती है करीब 12875 किलोमीटर की दूरी
X

आप ने देश और दुनिया में नहरें तो बहुत सुनी और देखी होगी। भारत में बहुत सी नहरें हैं। जिनका इस्तेमाल कृषि क्षेत्रों में खेती करने के लिए किया जाता है, लेकिन दुनिया में एक ऐसी भी नहर है। जिसका इस्तेमाल पानी के जहाज आने जाने में करते हैं। इतना ही नहीं इस नहर से गुजरने में 10 घंटे का समय लग जाता है। इसके साथ ही नहर से गुजरने पर एक तट से दूसरे तट पर जाने की दूरी करीब 12875 किलोमीटर कम हो जाती है। अगर नहर की जगह जहाज दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करें तो उन्हें दूसरे तट तक पहुंचने में दो हफ्ते का समय भी लग जाता है।

अमेरिका में स्थित यह सबसे बडी नहर पनामा

दरअसल, यह नहर अमेरिका में स्थित है। जिसका नाम पनामा हैं। यह पनामा नहर प्रशांत महासागर और (कैरेबियन सागर होकर) अटलांटिक महासागर को जोड़ती है। 82 किलोमीटर लंबी इस पनामा नहर को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रमुख जलमार्गों में से एक माना जाता है। जहां से हर साल 10-15 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े जहाज गुजरते हैं। हालांकि जब यह नहर बनी थी। तब यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सिर्फ 1000 हजार के आसपास ही थी।

12875 किलोमीटर की दूरी को करती है कम

मीडिया रिपोर्ग्स के अनुसार, अमेरिका में स्थित यह पनामा नहर पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच की दूरी को कम कर देती है। बताया जाता है कि वैसे तो पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच की दूरी करीब करीब 12,875 किलोमीटर है। इसमें एक से दूसरे छोर पर पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता। इतना ही नहीं इसमें दो से तीन हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन पनामा नहर के जरिये जहाज एक से दूसरे छोर पर सिर्फ 10 से 12 घंटे में ही पहुंच जाते हैं। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होती है। यहीं वजह है कि इस नहर में होकर गुजरने वाले जहाजों की संख्या धीरे धीरे बढते हुए 1000 हजार से करीब 15 हजार से भी ज्यादा जहाजों पर पहुंच गई। लगातार इसमें इजाफा ही होता जा रहा है। पनामा नहर मीठे पानी की झील 'गाटुन' से होते हुए गुजरती है। इसका जलस्तर समुद्रतल से 26 मीटर ऊपर है।

फ्रांस ने इस नहर को बनाने का काम किया था शुरू

जानकारी के अनुसार, पनामा नहर को फ्रांस ने साल 1881 में इसे बनाने का काम शुरू किया, लेकिन रहने की जगह नहीं होने और साफ-सफाई की कमी के चलते यहां काम कर रहे मजदूरों को बीमारियां होने लगीं और इंजीनियरिंग की परेशानियों के चलते इसे बीच में रोक दिया गया। इसके बाद वर्ष 1904 में अमेरिका ने इस नहर को बनाने का काम शुरू किया। जिसके बाद नहर बनाने का काम 10 साल में पूरा किया जा सका। इस नहर को बनाने का काम दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट माना जाता है।

Next Story