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बोलने में सबसे पीछे और तरक्की में सबसे आगे हैं इस देश के लोग

कि एक साथ लाखों की संख्या में लोग कम बोलते हो। आपने ऐसी किसी जगह के बारे में सुना है. जहां पर लोग कम बोलते हो। चलिए अगर नहीं भी सुनी है तो आज हम आपको ऐसे ही एक अजीबोगरीब जगह के बारे में बताने जा रहे है।

बोलने में सबसे पीछे और तरक्की में सबसे आगे हैं इस देश के लोग
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आपने अक्सर अपने आस के कुछ लोगों को कम बोलते हुए देखा हो। कई बार तो शायद आपने उन्हें टोक ही दिया होगा कि आप बोलते नहीं है क्या, आप हमेशा चुप ही रहते है क्या।

एक दो लोग अगर कम बोलते है तो इसका मतलब यह होता कि इन लोगों का स्वभाव ही ऐसा है। ये लोग कम बोलना ही पसंद करते है लेकिन क्या कभी आपने देखा है कि एक साथ लाखों की संख्या में लोग कम बोलते हो।

आपने ऐसी किसी जगह के बारे में सुना है. जहां पर लोग कम बोलते हो। चलिए अगर नहीं भी सुनी है तो आज हम आपको ऐसे ही एक अजीबोगरीब जगह के बारे में बताने जा रहे है।

जहां पर एक दो, लोग नहीं बल्कि पूरा शहर ही बहुत कम बात करता है। यूरोप का एक देश लातविया है, जिसे कम बोलने वालों का देश भी कहा जाता है और इस देश की कम बोलना यहां की संस्कृति का हिस्सा है।

लातविया के लोग काफी क्रिएटिव होते हैं और उनका मानना है कि कम बोलने से रचनात्मकता बढ़ती है। लातविया के एक मनोवैज्ञानिक के मुताबिक क्रिएटिविटी लातविया के लोगों की पहचान के लिए जरूरी है।

इसीलिए ये लोग कम बोलना पसंद करते हैं। उनका दिमाग हर समय कुछ नई चीजें सोचता रहता है। लातविया की लेखिका अनेते कोनस्ते के मुताबिक कम बोलना, लोगों से कम मिलना जुलना अच्छी आदत नहीं है।

जहां सारी दुनिया एक मंच पर आ गई है। हर विषय पर लोग खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। वहां लातविया के लोगों का खामोश रहना नुकसान दे सकता है और इन लोगों को अपनी आदत बदलने की जरूरत है।

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