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यहां सन् 1926 से नहीं मनती है होली,मासूमों को बचाने के लिए लिया था फैसला

गुण्डरदेही विकासखंड मुख्यालय से 9 किमी के फासले पर स्थित ग्राम चंदनबिरही में सन 1926 से होली का पर्व नहीं मनाया जाता।

यहां सन् 1926 से नहीं मनती है होली,मासूमों को बचाने के लिए लिया था फैसला
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दुर्ग. तहसील साहू संघ के चंदनबिरही निवासी अध्यक्ष नेतराम साहू बताते हैं कि गांव में मासूमों की त्योहार के दौरान कई वर्षों तक लगातार हुई मौतों के बाद गांव द्वारा लिया गया सामूहिक फैसला अब तक बरकरार है। ग्रामीणों को पूर्वजों से मिली जानकारी के अनुसार फागुन मास से पहले इस गांव में बीमारियों के चलते मासूम चल बसते थे।

आज वैज्ञानिक युग की माने तो असल में वह ‘माता’ (मिजल्स) की परिणति थी। बहरहाल, तब लिये गए फैसले को आज भी परंपरा की तरह सहेजते चंदनबिरही होली पर्व नहीं मनाता। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि तब 52 गांवों की जमीनदारी करने वाले स्व. ठाकुर निहाल सिंह की सहमति से लिए गए निर्णय का पालन आज भी चंदनबिरही में बहाल है।

यहां न तो होलिका दहन होता है और न ही फागुन का रंग-गुलाल खेला जाता है। अलबत्ता तब के होली के दौर में अखंड राम नाम सप्ताह की परंपरा भी अब तक चल ही रही है।

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