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दिवाली 2018: उल्लुओं की बलि का काला सच

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 5 2018 11:52AM IST
दिवाली 2018: उल्लुओं की बलि का काला सच

कुछ हिंदू मान्यताएं कहती हैं कि लक्ष्मी उल्लू की सवारी करती हैं, वहीं कहीं-कहीं इसका भी जिक्र मिलता है कि उलूकराज लक्ष्मी के सिर्फ साथ चलते हैं, सवारी तो वो हाथी की करती हैं। बहरहाल, मान्यताएं चाहे जितनी अलग बातें कहें, दिवाली से उल्लुओं का गहरा ताल्लुक जुड़ गया है।

ऐसा अंधविश्वास आज भी प्रचलित है कि दिवाली के रोज उल्लू की बलि देने से लक्ष्मीजी हमेशा के लिए घर में बस जाती हैं। यही वजह है कि दिवाली के कुछ दिन पहले से ही अवैध पक्षी विक्रेता एक-एक उल्लू को चार से दस हजार में बेचते हैं।

इस पक्षी के वजन, उसके रंग और दूसरी विशेषताओं को देखकर दाम तय होता है, हालांकि भारतीय वन्य जीव अधिनियम,1972 की अनुसूची-1 के तहत उल्लू संरक्षित पक्षियों के तहत आता है और उसे पकड़ने-बेचने पर तीन साल या उससे ज्यादा की सजा का नियम है,

लेकिन दिवाली पर इस प्रावधान की जबर्दस्त अनदेखी होती है। उल्लुओं के धन-समृद्धि से सीधे संबंध या शगुन-अपशगुन को लेकर ढेरों किस्से-कहानियां ग्रीक और एशियन देशों में भी प्रचलित हैं।

मुश्किल से मुश्किल हालातों में आखिरी समय तक सर्वाइव कर पाने वाला यह पक्षी अपनी इसी विशेषता के चलते पुराणों के अनुसार तंत्र साधना के लिए सबसे उत्तम माना गया है।

बड़ी-बड़ी आंखों वाला निरीह सा ये पक्षी हिंदू विश्वासों से सीधा जुड़ा हुआ है तो इसकी बड़ी वजह उसकी विशेषताएं हैं। चूंकि ये निशाचर है, एकांतप्रिय है और दिनभर कानों को चुभने वाली आवाज निकालता है इसलिए इसे अलक्ष्मी भी माना जाता है,

यानी लक्ष्मी की बड़ी बहन, जो दुर्भाग्य की देवी हैं और उन्हीं के साथ जाती हैं जिसके पूर्वजन्मों का हिसाब चुकाया जाना बाकी हो। एक मान्यता है कि लक्ष्मी का जन्म अमृत और उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी का जन्म हालाहल यानी विष से हुआ था।


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-Tags:#Diwali 2018#Dhanteras 2018#Laxmi#Owls Sacrifice

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