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पश्चिम बंगाल : चाइनीज काली माता मंदिर में लगाया जाता है चाउमीन का भोग

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टांगरा क्षेत्र में बना है काली माता का मंदिर जिसे चाइनीज काली माता के नाम से भी जाना जाता है। यहां आने वाले चाइनीज श्रद्धालु अपने धर्म के खास अंदाज में पूजा पाठ करते हैं।

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चाइनीज काली माता मंदिर

पश्चिम बंगाल में काली माता को विशेष रूप से पूजा जाता है और नवरात्रों में तो यहां की रौनक देखने लायक होती है। पश्चिम बंगाल में अनेकों काली माता मंदिर आपको मिल जाएंगे लेकिन आज हमको पश्चिम बंगाल में एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे वहां स्पेशल प्रसाद की वजह से जाना जाता है।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के टांगरा क्षेत्र में बना है काली माता का मंदिर जिसे चाइनीज काली माता के नाम से भी जाना जाता है। यहां आने वाले चाइनीज श्रद्धालु अपने धर्म के खास अंदाज में पूजा पाठ करते हैं।

काली माता के मंदिर में बंटता है नूडल का प्रसाद

कोलकाता के टांगरा में बने इस मंदिर के आस पास चाइनीज लोग अधिक रहते हैं। नूडल्स के रूप में इस मंदिर में प्रसाद का भोग लगाया जाता है। हालांकि यहां सिर्फ वहां बेस चाइनीज लोग ही नहीं बल्कि बंगाली लोग भी रोजाना आते हैं।


इस मंदिर की सबसे खास बात यहां बनने वाला प्रसाद ही है। इसके आलावा मंदिर में आने वाले श्रद्धालु एक पेपर को जलाते हैं जिसका मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी आत्माएं दूर भाग जाती है।

60 साल पुराना है चाइनीज काली माता मंदिर

बताया जाता है कि करीब 60 साल पहले एक भक्त ने पेड़ के नीचे दो पत्थर रखकर उसपर सिंदूर लगाया था और उसे माता का रूप देकर उसकी पूजा अर्चना की थी। तब से यहां लोग पूजा अर्चना करने लग गए और फिर करीब 50 साल बाद और अब से करीब 10 साल पहले इस जगह पर इ पक्का मंदिर बनवाकर माता की मूर्ति स्थापित की गई थी। इस मंदिर को चाइनीज मंदिर कहने के पीछे का कारण यही है कि यहां अधिकतर लोग चाइनीज है और पूजा करने भी वहीं लोग अधिक संख्या में आते हैं।


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