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गजब! खंबे में लगा मॉडल बताएगा कहां है बिजली की खराबी

राजधानी के लोगों को अब बिजली की खराबी पर घंटों बिजली बंद रहने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी ने अपने सब स्टेशनों को हाईटेक करने का काम प्रारंभ किया है।

गजब! खंबे में लगा मॉडल बताएगा कहां है बिजली की खराबी
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राजधानी के लोगों को अब बिजली की खराबी पर घंटों बिजली बंद रहने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी ने अपने सब स्टेशनों को हाईटेक करने का काम प्रारंभ किया है।

सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजेशन (स्काडा) सिस्टम से मिनटों में खराबी की जानकारी हो जाएगी। खंबों में लगा मॉडम यह जानकारी देगा कि कहां पर खराबी है। यह जानकारी कंट्रोल रूम में जाएगी।

रायपुर में इसके लिए गुढ़ियारी में कंट्रोल रूम तैयार हो गया है। इसके साथ सभी सब स्टेशनों को जोड़ने का काम चल रहा है। इसकी टेस्टिंग भी की जा रही है।

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प्रदेश में अब तक बिजली का अमला लाठीटेक ही रहा है, जिसके कारण बिजली बंद होने पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र की तो बात ही छोड़ दें, राजधानी के ही किसी हिस्से में बिजली बंद होने पर उसका फाल्ट खोजने में घंटों लग जाते हैं।

इस समस्या के समाधान में बिजली कंपनी बहुत समय से लगी थी। अब जाकर इसका समाधान मिला है। कंपनी द्वारा पहले चरण में रायपुर में सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजेशन (स्काडा) सिस्टम लगाया जा रहा है। इसका काम लगभग पूरा हो गया है।

ऐसे काम करेगा सिस्टम

बिजली विभाग के अधिकारियों के मुताबिक स्काडा सिस्टम के लिए बिजली के खंबों और ट्रांसफार्मरों पर मॉडम लगाए गए हैं। इन मॉडम में सिम लगे हुए हैं। इनका कनेक्शन सीधे कंट्रोल रूम से रहेगा। इसी के साथ 11 केवी और 33 केवी के सब स्टेशनों में फाल्ट मैसेज इंडीकेटर लगाए गए हैं।

जैसे ही किसी क्षेत्र में खराबी आएगी, वहां के खंबों एवं ट्रांसफार्मर की खराबी लोकेट होते हुए सीधे कंट्रोल रूम तक जाएगी। यहां जिस क्षेत्र में खराबी रहेगी, वहां के क्षेत्र को इंडीकेटर लाइट जलाकर बता देगा।

इसके बाद तत्काल कंट्रोल रूम उस क्षेत्र के अमले को जानकारी देगा कि कहां खराबी है और खराबी को तत्काल ठीक करने में अमला जुट जाएगा।

घंटों नहीं मिलता फाल्ट

आज जिस तरह की स्थिति राजधानी के साथ पूरे प्रदेश में है, उसमें कहीं भी एक छोटा सा फाल्ट होने पर उसे खोजने में घंटों लग जाते हैं। राजधानी में ही ऐसा कई बार हुआ है कि चार से छह घंटे में भी छोटा फाल्ट नहीं मिलता।

फाल्ट खोजने के लिए बिजली कंपनी के अमले के पास इस समय एकमात्र सहारा पेट्रोलिंग का ही है। पेट्रोलिंग कर संभावित खराबी के स्थान को तलाशा जाता है। इसी के साथ अगर किसी उपभोक्ता ने यह बता दिया कि यहां फाल्ट है, तो फाल्ट जल्द मिल जाता है।

दूसरे फीडर से सप्लाई भी

फीडरों में फाल्ट लोकेटर के साथ मॉडलर स्विच भी लगाए गए हैं। इस स्विच के लगने से एक फीडर में ज्यादा बड़ी खराबी होने से दूसरे फीडर से सप्लाई लेकर बिजली प्रारंभ कर दी जाएगी।

अभी होता यह है कि एक फीडर में खराबी होने पर उसकी खराबी दूर होने पर ही पावर सप्लाई हो पाती है। बिजली कंपनी अब सारे फीडरों को भी एक दूसरे से जोड़ने का काम कर रही है, ताकि किसी भी फीडर को किसी भी फीडर से सप्लाई दी जा सके।

सब स्टेशनों को जोड़ रहे

आरए पाठक ने कहा, राजधानी के 66 सब स्टेशनों को कंट्रोल रूम से जोड़ने काम चल रहा है। इसी के साथ टेस्टिंग भी चल रही है। यह काम पूरा होते ही नए साल में कंट्रोल रूम को प्रारंभ किया जाएगा।

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