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चेहरे पर लड़की ने ब्लड लगाकर फेसबुक पर पोस्ट की तस्वीर, वजह जानकर रह जाएगें हैरान

ऑस्ट्रेलिया की एक स्पिरिट हीलर और फॉर्मर हेयरड्रेसर 26 वर्षीय याजमीना जेद ने एक अजीबों गरीब लोगों के समाने ''Menstrual Periods'' की बात फेसबुक के जरीए समाज के सामने रखी।

चेहरे पर लड़की ने ब्लड लगाकर फेसबुक पर पोस्ट की तस्वीर, वजह जानकर रह जाएगें हैरान
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महिलाओं की माहवारी को लेकर रतीय समाज में कई तरह की अवधारणाएं बना जाती है, लेकिन अब समाज में इसे लेकर कई सारी प्रगतिशील चर्चाएं और बाते कहीं जाने लगी हैं। इसे अंग्रेजी में हम 'Menstrual Periods' भी कहते हैं।

इस मुद्दे को समाज के सामने पेश करने के लिए ऑस्ट्रेलिया की एक स्पिरिट हीलर और फॉर्मर हेयरड्रेसर 26 वर्षीय याजमीना जेद ने एक अजीबों गरीब कदम उठाया। जिसके बाद से वो एकाएक चर्चा में आ गई।
दरअसल, इस लड़की ने अपने पीरियड्स के ब्लड को चेहरे पर लगाया ताकि लोग इसे हेय दृष्टि से न देखें। महिला ने फिर इसे अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्‍ट कर दिया फिर क्‍या था। कई तरह के लोगों के कमेंट आने लगे, जिसमें कई यूजर्स ने इस पोस्ट के लिए लिखा की ये लड़की मानसिक तौर पर बीमार है।

ये शर्मिंदगी की चीज नहीं

लेकिन याजमीना का कहना है कि वो ये काम अपनी बॉडी को रिकनेक्ट करने के लिए करती है, जिसे हम सामाजिक शर्मिंदगी के चलते नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा करके लोगों को दिखाना चाहती थी, कि ये कोई शर्मिंदा होने वाली चीज नहीं है, बल्कि ये हमारी बॉडी का ही एक हिस्सा है।
याजमीना का कहना है कि आज की मार्डन लाइफ में इसे लेकर शर्मिंदगी की नजर से नहीं देखा जा सकता और ना महसूस की जा सकता है। फिर भी इससे जुड़े कई तरह के भ्रम को महत्व दिया जाता है।

सोश्ल मीडिया पर लोगों कुछ ये व्यू दिए

कि इसे चोरी-छिपे मैनेज करने की जरूरत नहीं है। इस वजह से उन्‍हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जाने लगा। इतना ही नहीं इसके साथ ही यूजर्स ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया और मेन्टल इंस्टीट्यूशन जाने की सलाह दे डाली।
लेकिन ये भी हकीकत है कि इस संबंध में सोशल मीडिया पर तमाम लोग अब खुलकर लिखने लगे हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष सभी इस मसले पर अब खुलकर बोल रहे हैं। ऐसी ही एक पोस्ट वीनित बिश्नोई नामक शख्स ने शेयर की है। इस पोस्ट में याजमीना के बारे में लिखा गया है।

कोई श्रापित चीज नहीं

बिश्नोई लिखते हैं यह कोई श्राप नहीं बल्कि महिलाओं की शारीरिक संरचना में प्राकृतिक परिवर्तन का हिस्‍सा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण से देखा जाए तो ये काफी सुलझी हुई प्रक्रिया है लेकिन वहीं जब इसे धार्मिक दृष्‍टिकोण से देखा जाता है तो ये एक तरह से कर्मकांड से जुड़ा एक बड़ा ही अजीबों गरीब मान्‍यताएं लेकर जन्‍म लेता है।
हालांकि आज का आधुनिक समाज पुरुष तथा महिला में कोई फर्क नहीं करता। इस आधुनिक दौर में महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।

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