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शिक्षा के लिए इस लड़के ने किया अनोखा करानामा, जानिए पूरा मामला

इंसान की इच्छाशक्ति के आगे हर मुश्किल दम तोड़ देती है, और किसी चीज को पाने की कोई जिद्द ठान ले तो उसके सामने आने वाली मुश्किले भी आसान हो जाती है।

शिक्षा के लिए इस लड़के ने किया अनोखा करानामा, जानिए पूरा मामला
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इंसान की इच्छाशक्ति के आगे हर मुश्किल दम तोड़ देती है, और किसी चीज को पाने की कोई जिद्द ठान ले तो उसके सामने आने वाली मुश्किले भी आसान हो जाती है। जी हां कुछ इसी तरह का कारनामा बिहार के बांका जिले में रहने वाले ब्रह्मदेव यादव ने कर दिखाया है।

ब्रह्मदेव यादव ने अपनी पढ़ाई को पूरा करने और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने के लिए कड़ाके की ठंड को सहते हुए क्रैश कोर्स जाता था। इसके लिए ब्रह्मदेव साइकिल से 54 किलोमीटर की दूरी तय करता था। जो बच्चे ट्यूश्न नहीं ले पाते है उनके लिए इस कोर्स को बांका के उन्नयन मे शुरू किया गया ।
आपको बता दें कि ब्रह्मदेव यादव इस क्रैश कोर्स में इंटर विज्ञान की परीक्षा की तैयारी के लिए जुड़ा था। जिसकी परिक्षा अब आने वाली छह फरवरी से शुरू होगी। बताते चले कि ब्रह्मदेव एमएवाई कॉलेज, ढाकामोड़ का छात्र हैं।
ब्रह्मादेव के पिता एक किसान हैं। छोटी सी जमीन में खेती बाड़ी करने के साथ-साथ वो अपने बच्चों का पालन-पोषण करते है। ब्रह्मादेव ने बताया कि घर की तंगी के कारण वो मैट्रिक की पढ़ाई सही से नहीं कर पाया जिसके लिए उसको 49 फीसद अंक मिले।

आर्थिक तंगी ने दिखाई नई राह

पैसे ना होने के कारण ब्रह्मदेव भौतिकी की परीक्षा में फेल हो गया। लेकिन इसके बावजूद ब्रह्मादेव हार नही मानी और फिर से परीक्षा का फॉर्म भर दिया। उसके किसी जानकार ने क्रैश कोर्स संस्थान के बारे में बताया था जहां गरीब बच्चों के लिए मुफ्त में शिक्षा दी जाती है। यह संस्थान बांका के उन्नयन में है।
इस संस्था में बांका के डीएम के साथ-साथ किसी ना किसी अन्य संस्थाओं के प्रोफेसर और शिक्षक पढ़ा रहे हैं, और क्रैश कोर्स का सारा जिम्मा शिक्षा विभाग उठा रहा है। ब्रह्मदेव ने अपने घर से क्रैश की दूरी साईकिल से तय की। उसके इसी लगन को देखते हुए सभी शिक्षक उसको प्रोत्सहित करते थे।
इसके लिए वो अपने गांव हेचला से रोज साइकिल चलाकर पढ़ाई करने बांका जाता था। ब्रह्मदेव ने बताया कि घर पहुंचने तक अंधेरा हो जाता था, रास्ता ना नजर आने के कारण साइकिल के आगे टॉर्च से लाईट का इंतजाम किया था।

सर्द रातों में भी चलाई साइकिल

जिस समय कड़ाके की ठंड पड़ती थी तो उन दिनों में भी ब्रह्मदेव साइकिल से ही अपना रास्ता तय किया करता था। कई बार वे बीमार भी पड़ा गया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उसके मन में बेहतर तरीके से इंटर की परीक्षा पास करने की ललक थी। उसके लिए पढ़ाई करने में जितना समय लगाता था इसका आधा समय वो अपने पिता के काम में हाथ बटाता था।

कलाम फाउंडेशन ने डीएम को किया है सम्मानित

ब्रह्मदेव के ऐसे कार्य को देखते हुए संस्थान को दो दिन पहले ही दिल्ली के विज्ञान भवन में कलाम फाउंडेशन की ओर से उन्नयन कोर्स की सफलता पर बांका के डीएम कुंदन कुमार को सम्मानित किया गया।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अलावा कई राज्यों ने उन्नयन क्रैश कोर्स का मॉडल बांका के डीएम से मांगा है। उन्नयन क्रैश कोर्स के पदाधिकारी अहसन ने बताया कि ब्रह्मादेव लगातार 70 दिन क्रैश कोर्स में शामिल हुए। साप्ताहिक टेस्ट में उनका रिजल्ट बेहतर रहा है।

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