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हैरतअंगेज: 335 साल बाद ‘राम'',‘लक्ष्मण'', ‘शत्रुघ्न'' से बिछड़ गए ‘भरत''

हैरतअंगेज कर देने वाली खबर ये है कि जगदलपुर के माचकोट क्षेत्र के तोलावाड़ा में राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत नाम के चारों सागौन के पेड़ों को वर्षों से की जा रही बचाने की कोशिश नाकाम हो गई है।

हैरतअंगेज: 335 साल बाद ‘राम,‘लक्ष्मण, ‘शत्रुघ्न से बिछड़ गए ‘भरत
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जगदलपुर. तब आप क्या सोचेंगे, जब आपको ये खबर मिले कि राम, लक्ष्मण और शत्रुघ्न से भरत बिछड़ गए हैं और उनकी सांसें टूट गई हैं। जी हां! ये सच है, लेकिन चौंकिए नहीं, ये हैरतअंगेज कर देने वाली खबर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से है।

दरअसल, ये एशिया के सबसे पुराने सागौन के पेड़ों में से चार पेड़ हैं, जिनके नाम चारों भाइयों के नाम पर रखे गए थे। दरअसल, भरत नाम के सागौन के पेड़ को अब पुरातात्विक धरोहर बनाने की कवायद चल रही है। जगदलपुर से 51 किलोमीटर दूर माचकोट। यहां के तोलावाड़ा वन परिक्षेत्र में खड़े हैं राम, लक्ष्मण और शत्रुघ्न, जिनमें आज भी जान है और इन्हें देखने के लिए लोग आते हैं। यहीं पर हैं भरत भी, जिनकी सांसें टूट चुकी हैं। वे जीवित नहीं हैं।

दरअसल इन सागौन के वृक्षों को रासायनिक उपचार के जरिए जीवित रखने की कवायद की गई थी, लेकिन भरत को बचाया नहीं जा सका। गवर्नमेंट कॉलेज के प्रोफेसर सुशील दत्ता के मुताबिक किसी इन्फेक्शन की वजह से भरत की मौत नहीं हुई, बल्कि उसने अपनी आयु पूरी कर ली है क्योंकि आम तौर पर 200 साल सागौन की आयु होती है, लेकिन इन वृक्षों ने 300 से ज्यादा साल तक अपनी जिंदगी जी है। इनमें राम, लक्ष्मण और शत्रुघ्न आज भी अच्छी स्थिति में हैं, जबकि इन्हें 335 साल से ज्यादा हो चुके हैं।

दिलचस्प है नामकरण की कहानी: दरअसल, दंडकारण्य क्षेत्र सेभगवान राम की कथा जुड़ी है। छत्तीसगढ़ उनका ननिहाल है। इसी कारण भगवान राम को सम्मान देने चारों भाइयों के नाम पर इन वृक्षों का नाम रखा गया। ये हैं इनकी खासियतें पूर्व वन अधिकारी तथा इस क्षेत्र में लंबे समय तक रेंज अफसर रहे विक्रम सिंह के मुताबिक ये पेड़ छत्तीसगढ़ के पर्यटन नक्शे में भी शामिल हैं। पर्यटकों के यहां पहुंचने की अच्छी व्यवस्था कर दी है। इस क्षेत्र में सागौन के वृक्षों की भरमार है। यहां रहने वाले लोग इनकी रक्षा का दायित्व निभाते हैं और इनके लिए उनके मन में श्रद्धाभाव भी है।

ये चारों विशालकाय वृक्ष अनमोल धरोहर है। उस समय के वन संरक्षक ने इन्हें बचाकर अच्छा काम किया। घनघोर जंगल में होने के कारण लोगों तथा पर्यटकों को इनके दर्शन नहीं हो पाते। इनका बचे रहना ही अच्छी बात है। क्योंकि मालिक मकबुजा में सागौन वृक्षों का नाश हो गया। (शरद वर्मा, पर्यावरण विद्)

चारों पेड़ पूरी तरह से मैच्योर हो चुके हैं, अधिक उम्र होने से पेड़ों की शाखाएं भी सूख रही हैं और अंदर से पोला भी होता जा रहा है। भरत नाम का पेड़ पूरी तरह से सूख गया है , वह कभी भी गिर सकता है। बाकि तीनों की स्थिति काफी अच्छी है और वे तीनों स्वस्थ हैं। भरत को किसी संग्रहालय में धरोहर के रूप में सुरक्षित रखना चाहिए। क्योंकि 300 साल से अधिक आयु का वृक्ष कहीं और नहीं है। (रतन कश्यप, रेंज अफसर)

‘राम',‘लक्ष्मण', ‘शत्रुघ्न' और ‘भरत' की कहानी

  • जगदलपुर के माचकोट क्षेत्र के तोलावाड़ा में इन नामों के चारों सागौन के पेड़ों को वर्षों से की जा रही बचाने की कोशिश, रासायनिक उपचार के बाद भी भरत को बचाया नहीं जा सका, इतने वर्षों तक जिन्दा रहने के बाद भरत नाम के सागौन वृक्ष ने तोड़ दिया दम, ये सभी पर्यटन नक्शे में शामिल
  • माचकोट में ही 2016 में दो तीन दिनों तक भीषण आग लगी थी लेकिन इस क्षेत्र में कुछ नहीं हुआ। उस दौरान साल और सागौन के कई पेड़ जलकर ख़ाक हो गए थे, जिनमें करोड़ाें का नुकसान आंका गया था, लेकिन ये इत्तेफ़ाक था कि इन पेड़ों को कुछ नहीं हुआ।
  • राम की गोलाई सबसे ज्यादा: राम की गोलाई 598 सेमी और ऊंचाई 43.05 मीटर है। लक्ष्मण की 500 सेमी तथा 43.40 मीटर, भरत की 536 सेमी और 45.50 मीटर तथा शत्रुघन की 314 सेमी और ऊंचाई 38.05 मीटर है।
  • विक्रम सिंह ने बताया कि 1982 में इन चारों की आयु 300 से 500 साल के बीच आंकी गई थी। पेड़ों के चक्र के हिसाब से उम्र निकाला गया था। यदि तब 300 भी मानी जाए, तो इस हिसाब से आज इनकी आयु 335 वर्ष होनी चाहिए।
  • ये जहां है, ओडिशा का बार्डर लगता है। तस्कर सक्रिय हैं। 1982-83 में तत्कालीन वन संरक्षक पीएन राजवाड़े एवं डीएफओ पीएस पणीकर ने इन्हें बचाने में अहम भूमिका निभाई। सुरक्षा के लिए इनका नामकरण राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखा गया।

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